फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

डीडीयू : हाशिए पर पहुंचे विषयों में घटेंगे शिक्षकों के स्वीकृत पद, लोकप्रिय में होगा समायोजन

विज्ञापन
विज्ञापन
विभागवार शिक्षकों के स्वीकृत पद की अदला-बदली की शासन से सिफारिश करेगा डीडीयू
विज्ञापन

गठित होगी समिति, शिक्षकों के समायोजन के बाद लोकप्रिय पाठ्यक्रमों में सीट वृद्धि का रास्ता भी हो जाएगा साफ

गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में हाशिए पर पहुंचे विषयों में शिक्षकों के स्वीकृत पद में कटौती की जाएगी। इन पदों का समायोजन वर्तमान दौर के लोकप्रिय पाठ्यक्रमों में किया जाएगा। इससे लोकप्रिय पाठ्यक्रमों की सीटें भी बढ़ेंगी। इसे लेकर डीडीयू प्रशासन समिति का गठन करने जा रहा है। समिति की रिपोर्ट के आधार पर समायोजन की सिफारिश शासन से की जाएगी।
आजादी के बाद स्थापित उत्तर प्रदेश के पहले राज्य विश्वविद्यालय डीडीयू में उस दौर की मांग के हिसाब से कई पाठ्यक्रम शुरू हुए थे। मसलन, दर्शनशास्त्र, उर्दू, संस्कृत और रक्षा अध्ययन जैसे विषयों की उस दौर में खूब मांग थी। हाल के दशकों में करीब 10 पाठ्यक्रमों में सीटों के बराबर भी आवेदन प्राप्त नहीं हो पा रहे। इन विषयों में बिना परीक्षा के ही प्रवेश दिए जा रहे हैं। शिक्षक-छात्र अनुपात के लिहाज से देखा जाए, तो वहां शिक्षकों की संख्या अधिक है।
विज्ञापन

वहीं, हाल के वर्षों में वाणिज्य, विधि, अंग्रेजी, समाजशास्त्र और राजनीति शास्त्र समेत कई पाठ्यक्रम बेहद लोकप्रिय हुए हैं। इन विषयों की मांग भी खूब है लेकिन शिक्षकों की संख्या निर्धारित होने की वजह से सीटें नहीं बढ़ पातीं।
इसे देखते हुए डीडीयू प्रशासन ने समीक्षा की योजना बनाई है। इसके तहत जो पाठ्यक्रम अलोकप्रिय हो चुके हैं, वहां शिक्षकों के स्वीकृत पदों की कटौती कर लोकप्रिय पाठ्यक्रमों में जोड़े जाने की योजना है। इसके लिए गठित समिति कई बिंदुओं पर रिपोर्ट तैयार करेगी।

-
16 से 18 घंटे होना चाहिए वर्कलोड
बताया जा रहा है कि विभागवार शिक्षकों का वर्कलोड देखा जाएगा। यूजीसी के मानक के अनुसार, सप्ताह में असिस्टेंट प्रोफेसर का वर्कलोड 18 घंटे होना चाहिए। इसी तरह प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर का वर्कलोड 16-16 घंटे होना चाहिए। वर्कलोड में सिर्फ अध्यापन और प्रैक्टिकल को ही शामिल किया जाता है।
विज्ञापन


-
वर्जन-
पिछले सात दशकों में बहुत कुछ बदल गया है। कई पाठ्यक्रमों की लोकप्रियता बढ़ी है, जबकि कई में छात्र अनुपात कम हुआ है। इसके लिए समिति का गठन किया जाएगा। समिति की रिपोर्ट के आधार पर शासन से अलोकप्रिय हो चुके विषयों से स्वीकृत पदों की कटौती कर लोकप्रिय पाठ्यक्रमों में समायोजित करने की सिफारिश की जाएगी।
- प्रो. पूनम टंडन, कुलपति, डीडीयू
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें