गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में पहली बार सेल्फ फाइनेंस मोड में शुरू हो रही पीएचडी आसान नहीं होगी। नियमित की तुलना में इन पाठ्यक्रमों में पीएचडी के लिए लगभग सात गुना ज्यादा शुल्क देना होगा। पार्ट टाइम पीएचडी की फीस भी लगभग पांच गुना अधिक है।
डीडीयू में पहली बार स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों में पीएचडी शुरू हो रही है। इसके तहत कृषि, इंजीनियरिंग और फार्मेसी में पीएचडी की 90 सीटों पर प्रवेश की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। एडमिशन पोर्टल पर अपलोड ब्रोशर के मुताबिक, स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों के पहले सेमेस्टर में प्रायोगिक विषयों में 53,123 व गैर प्रायोगिक में 43,123 रुपये शुल्क लगेगा। द्वितीय सेमेस्टर और उसके बाद सभी सेमेस्टर में पीएचडी पूर्ण होने तक प्रायोगिक विषयों में 41,788 और गैर प्रायोगिक में 31,788 रुपये शुल्क देना होगा। पार्ट टाइम पीएचडी में भी प्रायोगिक विषयों में 31,723 और गैर प्रायोगिक में 30,723 रुपये शुल्क तय किया गया है।
नियमित पाठ्यक्रमों में कम शुल्क
नियमित पाठ्यक्रमों में पीएचडी करने पर शुल्क तुलनात्मक रूप से बेहद कम है। नियमित के प्रायोगिक विषयों में पहले सेमेस्टर में 13,723 व द्वितीय सेमेस्टर से 6388 रुपये शुल्क तय किया गया है। गैर प्रायोगिक विषयों में शुल्क पहले सेमेस्टर में 12,723 और दूसरे सेमेस्टर से 5388 रुपये तय किया गया है।
सेल्फ फाइनेंस मोड में पीएचडी के लिए शुल्क लागू करने से पहले दूसरे विश्वविद्यालयों की संरचना का भी अध्ययन किया गया था। दूसरे संस्थानों की तुलना में स्व वित्तपोषित पाठ्यक्रमों में पीएचडी का शुल्क बहुत कम रखा गया है। वित्त समिति से मंजूरी के बाद शुल्क लागू किया गया है।
- प्रो. पूनम टंडन, कुलपति, डीडीयू