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सीएम योगी जता चुके नाराजगी, पीएमओ से हो रही निगरानी फिर भी सड़क बदहाल

Sat, 11 Jul 2020 08:07 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

  • सीएम योगी जता चुके नाराजगी, पीएमओ से हो रही निगरानी फिर भी सड़क बदहाल
  • गोरखपुर से बड़हलगंज तक 60 किलोमीटर का सफर तीन घंटे में होता है पूरा
  • डीएम के निर्देश पर भी नहीं भरे जा रहे बड़हलगंज तक की सड़क पर बने गड्ढे
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Gorakhpur news - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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निर्माणाधीन गोरखपुर-वाराणसी फोरलेन अब बवाल-ए-जान बन गया है। सड़क की बदहाली का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि गोरखपुर से बड़हलगंज तक 60 किलोमीटर का सफर तीन घंटे में पूरा हो रहा है। जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे पड़ गए हैं जिनमें फंस कर रोजाना कई गाड़ियां खराब हो रही हैं।

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लोग दुर्घटनाग्रस्त होकर चुटहिल भी हो जा रहे हैं। इधर गड्ढों में पानी भर जाने से सड़क का हाल और खराब हो गया है। मोटरसाइकिल चालकों का तो और भी खराब हाल है। बगल से कार, बस या ट्रक गुजरने पर बाइक सवार कीचड़ से नहा ले रहे हैं।

इस सड़क की बदहाली तब है जब खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसके धीमे निर्माण पर न केवल कई बार नाराजगी जता चुके हैं बल्कि केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को कार्यदायी संस्था को काली सूची में डालते हुए कार्रवाई के लिए भी लिख चुके हैं। यही नहीं खुद पीएमओ से इस सड़क की निगरानी हो रही है तब भी निर्माण कार्य में अपेक्षित गति नहीं दिखाई पड़ रही।
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दो दिन पहले डीएम के. विजयेंद्र पांडियन ने इस मार्ग के निरीक्षण के दौरान एनएचएआई के अफसरों पर गहरी नाराजगी जताई थी। उन्होंने निर्देश दिए थे कि निर्माण कार्य जब भी पूरा हो मगर गड्ढों को तत्काल पाट दिया जाए ताकि दुर्घटनाओं को रोका जा सके और सड़क आवागमन लायक बन सके। उन्होंने यह भी कहा था कि जहां एक तरफ के लेन का निर्माण कार्य पूरा हो गया है, उसे आवागमन के लिए खोल दिया जाए।

 

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एनएच-29 पर फंसा ट्रक, दस घंटे बाधित रहा आवागमन

गोरखपुर-वाराणसी मार्ग पर बेलीपार थाना क्षेत्र के ग्राम सभा जंगल दीर्घन सिंह के पास कार्यदायी संस्था द्वारा सड़क की खुदाई कर गिट्टी और मिट्टी डालकर छोड़ा गया है। लगातार हो रही बारिश में सड़क बड़े-बड़े गड्ढों में तब्दील हो गई है। जिसके चलते शुक्रवार रात करीब 11 बजे जंगल दीर्घन सिंह के पास एक ट्रक धंस गया, इससे जाम लग गया।

एक तरफ मेहरौली तो दूसरी तरफ बेलीपार थाने तक गाड़ियों की लंबी कतार लगी रही। शनिवार सुबह 9 बजे जेसीबी लगाकर फंसे ट्रक को बाहर निकाला गया, जिसके बाद आवागमन शुरू हुआ। लेकिन कुछ देर बाद पुन: जाम लग गया, जिसे बेलीपार थानाध्यक्ष के प्रयास से सुबह 11 बजे खुलवाया गया। यदि लॉकडाउन नहीं होता तो स्थिति और भी विकट हो गई होती।

2016 में हुआ था शिलान्यास, चार साल में भी नहीं बन पाई सड़क
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने 2016 में गोरखपुर-वाराणसी फोरलेन की आधारशिला रखी थी। काम अक्टूबर 2019 में पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया था। इसके निर्माण की जिम्मेदारी जेपी एसोसिएट को दी गई है। काम की रफ्तार शुरू से ही धीमी होने पर कई बार कार्यदायी संस्था पर सवाल उठ चुके हैं। मुख्यमंत्री से होते हुए मामला पीएमओ तक पहुंचा तो एनएचएआई ने मार्च 2020 में नया लक्ष्य तय करते हुए चेताया था कि अगर इस समयावधि तक काम पूरा नहीं हुआ तो संस्था को ब्लैक लिस्ट कर दिया जाएगा मगर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

 
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अभी 50 फीसदी भी पूरा नहीं हो सका काम

लक्ष्य पूरा करने का दो-दो बार समय बीतने के बाद भी अभी तक 50 फीसदी काम भी पूरा नहीं हो सका। एनएचएआई के परियोजना प्रबंधक श्रीप्रकाश पाठक ने बताया कि वर्तमान में 42 फीसदी निर्माण कार्य ही हो पाया है । पिछले दो महीनों में काम में तेजी आई है।

फर्म भी काम में तेजी लाना चाहती है ताकि भुगतान हो सके। उन्होंने बताया कि कुछ स्थानों पर गड्ढे हो गए हैं और उसमें गाड़ियां फंस जा रही हैं। गड्ढों को भरने का निर्देश संस्था को दिया गया है। लगातार बारिश की वजह से गड्ढे भरने और सड़क निर्माण कार्य में दिक्कत आ रही है।

37 करोड़ रुपये जारी किए गए
एनएचएआई के परियोजना प्रबंधक श्रीप्रकाश पाठक ने बताया कि गोरखपुर -वाराणसी मार्ग पर गोरखपुर डिवीजन के तहत दो  बाईपास बनाए जा रहे हैं। बाईपास की छूटी हुई सड़कों की मरम्मत के लिए 37 करोड़ रुपए लोक निर्माण विभाग को दे दिए गए हैं। कौड़ीराम बाईपास की छूटी हुई सड़क लगभग चार किलोमीटर है जबकि बड़हलगंज -दोहरीघाट बाईपास 8 किलोमीटर, दोनों की कुल लंबाई 12.24 किलोमीटर है। लोक निर्माण विभाग इस पर काम करा रहा है।

यह सच है कि पूरी सड़क की हालत बहुत खराब हो गई है। जगह-जगह गड्ढे बन गए हैं। बरसात में चलना मुश्किल है। एनएचएआई के अफसरों को सभी गड्ढे जल्द भरने के साथ ही जहां एक तरफ की लेन बन गई है, उसे आवागमन के लिए खोलने का निर्देश दिया है। जल्द ही सड़क का दोबारा निरीक्षण करूंगा। गड्ढे भरे नहीं मिले तो कार्रवाई की जाएगी। - के. विजयेंद्र पांडियन, डीएम
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