गोरखपुर के जीतेंद्र पाल बताते हैं कि 27 फरवरी 2022 को हमारी शादी हुई थी। मैं, जीतेंद्र पाल अपनी अर्द्धांगनी शिल्पा के साथ गृहस्थ जीवन में प्रवेश कर गया था। शादी के बाद सभी ने पत्नी के साथ बाहर जाने की सलाह दी। हालांकि, मन तो मेरा भी था, लेकिन खुद से पहल कर घर वालों के सामने बोलने की हिम्मत नहीं हुई। और अंतिम में छोटे भाई ने जबरदस्ती एक दिन बोला, भईया और भाभी आपके लिए श्रीनगर में सारा अरेंजमेंट कर दिया है। दोनों लोग सुबह निकल जाइएगा। ड्राइवर को भी बता दिया है।
इसी के साथ शादी के छह माह बाद अक्तूबर में दोनों घर से श्रीनगर के लिए निकल गए। बीच रास्ते में लखनऊ और आगे की तरफ घूमते हुए रास्ते में ही पत्नी ने बोला, श्रीनगर तक चल रहे हैं तो क्यों न जम्मू चलकर वैष्णों देवी का दर्शन कर लिया जाए। इसके बाद प्लान में बदलाव हुआ।
दोनों ने पहले वैष्णों मां के दरबार में जाकर अपने नए जीवन के सफर की हाजिरी लगाई। इसके बाद श्रीनगर की तरफ रवाना हुए। श्रीनगर को धरती का स्वर्ग सुना था, लेकिन ये वो समय था जब उसी स्वर्ग में अपने हमसफर के साथ पहुंचने वाला था। तय समय पर श्रीनगर पहुंचे। श्रीनगर एक घाटी में बसा है इसलिए एकदम से एहसास नहीं हुआ कि किसी हिल स्टेशन में आ गए है।
श्रीनगर डल झील के सामने ही बिलवर्ड रोड हैं, जहां बड़ी संख्या में होटल हैं। होटल में रात रूकने के बाद अगले दिन सबसे पहले डल झील को ही देखने का निर्णय किया। जब झील को पहली बार देखा को देखता ही रह गया। विश्वास ही नहीं हो रहा था कि अब तक जिस डल के बारे में पढा भर था या दूसरों से सुना था आज मैं इसके सामने खडा हूँ। डल में तैरते रंग बिरंगे शिकारे अलग ही छटा बिखेर रहे थे।
झील घूमन के बाद शहर के अंदर घूमकर जितना पहुंच सकता था, प्रयास किया। श्रीनगर शहर को धरती का स्वर्ग ही नहीं, बल्कि एक ऐसी दुनिया थी, जिसमें डल में बस झील थी। किनारे बसे हजारों घर, दुकाने, स्कूल और अस्पताल सब थे। श्रीनगर और आस पास घूमते घूमते पांच दिन बीत गए। इसके बाद वापस सीधे घर के लिए निकल गए।