वहीं, कुछ मासूम रास्ते भर तो उत्साह के साथ आए और जैसे ही स्कूल नजर आया चेहरे की हवाइयां गुम हो गई। स्कूल के अंदर जाने को तैयार ही नहीं थे। उन्हें समझाकर और छुट्टी के समय चाकलेट- टॉपी खरीदने का लालच देकर किसी तरह स्कूल परिसर में ले गए।
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कक्षा एक से आठ तक के सभी सरकारी और निजी स्कूलों सोमवार को खुले तो चहल पहल बढ़ गई। हालांकि, कुछ निजी स्कूल 26 जून से ही खुल गए थे लेकिन वे गिनती के थे। सरकारी स्कूलों में बच्चों का तिलक लगाकर अभिनंदन किया गया। हालांकि, छोटे-छोटे बच्चे यहां भी बेमन से आए थे। वहीं, एचपी चिल्ड्रेन स्कूल में अंश को लेकर उनकी मम्मी पहुंची थीं।
जैसे ही अंश को गेट के अंदर लेकर जाने लगीं, वह रोने लगा। सुबकते हुए बोला-मम्मी आज रहने दो ना, कल से आएंगे..। पापा के साथ आया रमन तो बाइक से उतरने को ही तैयार नहीं था। पीछे बैठीं उनकी मम्मी ने गोद में उठा लिए तो चिल्लाने लगा। प्लीज..आज रहने दो।
दरअसल, डेढ़ महीने से स्कूल आने की आदत छूट गई थी। एक तो सुबह जल्दी इन बच्चों की आंखें नहीं खुली। एक बच्चे की मां ने बताया कि सुबह आधे घंटे से उठाया तो जाकर बेटे की आंख खुली। पहले तो न जाने का ड्रामा किया लेकिन, जब जान गया तो बेमन से तैयार हुआ। अब इसका ड्रामा यहां भी शुरू हो गया। खैर, दिक्कत तो हमें भी हुई। आदत छूट गई थी और दिनचर्या भी बदल गई थी।
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मुझे घर जाना है दीदी
पिलर्स स्कूल में कक्षा दो में पढ़ने वाले अपने भाई अक्षय को स्कूटी से लेकर बेतियाहाता की सीमा सिंह पहुंची थीं। अक्षय पहले तो हंसते हुए आया। जैसे ही स्कूल देखा तो दीदी से लिपट गया। इसके बाद बोला, दीदी प्लीज हमें घर जाना है। जब दीदी ने समझाया तो कहा कि होमवर्क पूरा नहीं है। मिस डांटेंगी। दीदी ने कहा कि हम मिस से बात कर लेंगे। आप परेशान न हो, जाओ। जब कोई बहाना काम नहीं आया तो सुबकने लगा। किसी तरह से स्कूल में गया।