पीपीगंज में 14 साल की किशोरी से दुष्कर्म, गर्भधारण और जन्मते ही नवजात की हत्या के मामले में एफआईआर के बाद हरकत में आई पुलिस एकबार फिर बैकफुट पर आ गई है। विवेचना को आगे बढ़ाने के लिए अब पुलिस विधिक सलाह लेने की बात कह रही है। नवजात की हत्या की विवेचना में विधिक सलाह की जरूरत क्या आन पड़ी, यह सवाल किसी के समझ में नहीं आ रहा।
खबर है कि पुलिस ने गोपनीय तरीके से पिता से बातचीत कर लड़की को घर बुलाने का दबाव बनाया है। इस पूरे प्रकरण में पुलिस की हीलाहवाली की वजह क्या है, अब तो यह भी क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है। चर्चा है कि प्रभावशाली ठेकेदार की थाना पुलिस में सेटिंग है और उसके ही दबाव में पुलिस कार्रवाई से बच रही है। ठेकेदार के कई माननीय से अच्छे ताल्लुकात हैं, इस वजह से भी पुलिस उसके खिलाफ जाने से बचती है।
11 फरवरी को कैंपियरगंज पुलिस ने घटनास्थल का मुआयना किया था। उसी दिन से गांव से वह किशोरी गायब है, जिसने नवजात को जन्मा था। पुलिस अभी तक यह पता नहीं लगा सकी है कि आखिर वह लड़की है तो कहां? उसके साथ अगर कोई अनहोनी होती है तो पुलिस सीधे तौर पर जिम्मेदार होगी।
मामला संज्ञान में आने पर एसएसपी डॉ. सुनील कुमार गुप्ता ने जांच का आदेश दिया तो पुलिस थोड़ी सक्रिय जरूर हुई। शनिवार को पीपीगंज और कैंपियरगंज पुलिस ने गांव में जाकर किशोरी के बारे में जानकारी जुटाई थी। उधर, कैंपियरगंज पुलिस ने किशोरी के पिता से संपर्क कर बयान के लिए उन्हें सोमवार को थाने में बुलाया था।