उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में चौबेपुर बिकरू गांव में कुख्यात अपराधी विकास दूबे से पुलिस मुठभेड़ में आठ पुलिस के जवान शहीद और कई पुलिस कर्मी घायल हो गए। इस घटना को लोग भूल नहीं पा रहे हैं। उधर, इस घटना ने संतकबीरनगर जिले के धनघटा क्षेत्र में पूर्व में पुलिस पर हुए हमलों की याद ताजा कर दी है। 22 साल पूर्व पौली में एक दरोगा को बंधक बनाकर मारा पीटा गया था।
फरवरी 1998 में दो पक्षों के बीच हुए जमीन संबंधी विवाद के मामले में थाने के एसआई शोभनाथ पांडेय पौली में पहुंचे थे, जहां एक पक्ष विवादित जमीन पर मकान का निर्माण करवा रहा था। उसे दूसरा पक्ष रोक रहा था।
मौके पर पहुंचे दरोगा जब दोनों पक्षों को समझा बुझाकर एसडीएम के आदेश का हवाला दे रहे थे। उसी समय एक पक्ष दरोगा पर भड़क उठा और उनको पकड़ कर मारने-पीटने के साथ उनकी सर्विस रिवाल्वर अपने कब्जे में ले लिया। दरोगा के साथ गए सिपाही की राइफल भी छीन ली।
सिपाही किसी तरह थाने पहुंचा और दरोगा के बंधक बनाए जाने की सूचना तत्कालीन एसओ बशर अहमद खान को दिया। दरोगा के बंधक बनाए जाने की सूचना पर पूरे जिले की फोर्स पौली की तरफ रवाना हो गई। काफी संख्या में पुलिस के आने की सूचना पर दरोगा पर हमला करने वाले लोग भाग निकले थे। इस मामले में कई लोगों के विरुद्ध केस दर्ज हुआ था, जो वर्तमान में कोर्ट में विचाराधीन है।