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पुलिस को बदमाशों पर पूरा ‘यकीन’, अफसरों के जगाने के बाद खुले ये राज

Sun, 13 Sep 2020 04:06 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

  • बदमाशों ने जब भी चाहा पुलिस को आसारी से गुमराह किया, अफसर के हस्तक्षेप पर बदलती है कहानी
  • पेड़ से लटकती लाश मिलने पर पुलिस तुरंत ही खुदकुशी बोतली, कई मामले में हत्या निकला
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में अक्सर पुलिस के कर्मचारी जांच से बचने के लिए बदमाशों की उलझाने वाली थ्योरी पर यकीन करके मामले को रफादफा करने की कोशिश करते हैं। ऐसे में वारदात की हकीकत सामने नहीं आ पाती है। लेकिन कई मामलों में शिकायत पुलिस के आला अधिकारियों तक पहुंच जाती है और वह दिलचस्पी दिखाते हैं तो कहानी बदल जाती है। यही वजह है कि कुछ दिन पहले एडीजी दावा शेरपा ने छोटे या बड़े किसी भी मामले की सूचना आने पर अफसरों को मौके पर जाने का निर्देश दिया है, ताकि हकीकत का पता चल सके।

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जानकारी के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और साक्ष्यों को दरकिनार कर पुलिस कई बार बदमाशों के जाल में फंसकर जिस मामले को खुदकुशी मान लेती है, जांच में वही मामला हत्या का निकलता है। ऐसे कई उदाहरण हैं जिसमें थाना पुलिस की यह लापरवाही उजागर हो चुकी है।

हत्या के बाद शव को पेड़ से लटकाने का मामला हो या गोली लगने से मौत का। अगर ऐसे मामलों में अफसर मौके पर नहीं गए हैं तो थाना पुलिस इसे खुदकुशी मानकर वही साबित करने में लग जाती है। जब अफसर हस्तक्षेप करते हैं तो जांच नए सिरे होती है और सच्चाई सामने आती है।

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केस एक

15 फरवरी-2020 को कोतवाली इलाके के नखास में दवा कारोबारी सईद का घर में गोली लगा शव मिला। उन्हें दो गोली लगी थी। एक कनपटी पर और एक सीने पर। इसके बावजूद पुलिस इसे खुदकुशी मान रही थी। डीआईजी राजेश डी मोदक के हस्तक्षेप पर एसपी सिटी डॉ. कौस्तुभ ने खुद जांच शुरू कर दी और फिर हैंड वॉश रिपोर्ट आने के बाद साफ हो गया कि हत्या हुई है। पुलिस ने इस मामले में बेटे को गिरफ्तार किया और मामला हत्या का निकला।
 
केस दो
24 नवंबर-2019 को खोराबार इलाके में प्रापर्टी डीलर बलराम यादव की गोली लगने से मौत हो गई। शुरुआती जांच के बाद पुलिस ने इसे खुदकुशी बताया, लेकिन फोरेंसिक टीम ने हैंड वॉश ले लिया था। घरवालों ने अफसरों से फरियाद लगाई तो पुलिस ने हत्या का केस दर्ज कर छानबीन शुरू की। हैंड वॉश रिपोर्ट आने के बाद साफ हो गया कि बलराम ने खुद को गोली नहीं मारी थी, बल्कि गोली मारकर उनकी हत्या की गई थी। हालांकि इस जांच को पुलिस अभी तक पूरा नहीं कर पाई है।
 
केस तीन
24 जून-2020 को चौरीचौरा इलाके के डुमरी घास गांव में पेड़ से लटकती फाइनेंस कंपनी एजेंट गुलरोदन की लाश मिली थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट को दरकिनार कर पुलिस ने इसे खुदकुशी माना और फाइल बंद कर दी। जबकि गुलरोदन की पत्नी सुनीता देवी, प्रधान प्रतिनिधि और फाइनेंस कंपनी के संचालक राधेश्याम मौर्या पर हत्या कर शव को पेड़ लटकाने का आरोप लगा रही थीं। फरियाद एसएसपी तक पहुंची तो मामले में 10 सितंबर को पुलिस ने हत्या का केस दर्ज कर छानबीन शुरू की है।
 
केस चार
4 अप्रैल-2018 बड़हलगंज इलाके के लखनापार में दिव्यांग रामप्रीत की लाश मिली थी। पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद इसे खुदकुशी बताया, लेकिन बेटी बबीता ने अफसरों से गुहार लगाई और हत्या का आरोप पांच लोगों पर लगाया। पुलिस ने मामले में एसएसपी के आदेश पर हत्या का केस दर्ज कर जांच शुरू की तो मामला सही मिला। पता चला कि हत्या करने के बाद शव को लटकाया गया था। इस मामले के आरोपितों  को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भी भेजा था।
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