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Kanpur Encounter News: 15 साल पहले यहां भी हमलावर हो गई थी भीड़, जान बचाकर पैदल भागे थे दारोगा

Mon, 06 Jul 2020 04:29 PM IST
vivek shukla इंद्रेश यादव, धनघटा (संतकबीरनगर)।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : PTI
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लोगों की सुरक्षा में हमेशा तत्पर रहने वाली पुलिस कब कहां जनाक्रोश की शिकार हो जाए, इसका कोई ठिकाना नहीं रह गया है। कानपुर में आधी रात को कुख्यात अपराधी को दबोचने के प्रयास में जान गंवाने वाले पुलिसकर्मियों की शहादत को लोग नमन करते हुए पुलिस के कार्यो की सराहना करने के साथ उन पर होने वाले हमलों को याद कर रहे है।

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ऐसा ही एक मामला संतकबीरनगर के धनघटा क्षेत्र के अहरा गांव में 15 साल पहले हुआ था। कानपुर की घटना के बाद इन दिनों क्षेत्र में इस घटना की भी चर्चा हो रही है।

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फौजी की हुई थी हत्या

बात फरवरी 2005 में अहरा गांव में दो पक्षों के बीच जमीन संबंधी विवाद हुआ था। जिसमें एक पक्ष के छुट्टी पर घर लौटे फौजी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। अहरा में हत्या की सूचना पर धनघटा व महुली थाने की पुलिस घटना स्थल के लिए रवाना हो गई।

पुलिस की गाड़ी जैसे ही गांव के बाहर खड़ी हुई वैसे ही पीड़ित पक्ष के लोगों का गुस्सा पुलिस पर ही फूट पड़ा। लोग ईंट-पत्थर व लाठी डंडे से पुलिसकर्मियों पर प्रहार करने लगे। जिन्हें समझाने में असफल होने पर पुलिस ने वहां से भागना ही मुनासिब समझा

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तत्कालीन थानाध्यक्ष के एम दुबे ने धैर्य और समझ का परिचय देते हुए वहां से पुलिसवालों के साथ हैंसर बाजार की तरफ पैदल ही भाग निकले। नाराज भीड़ ने पुलिस की गाड़ी को क्षतिग्रस्त कर दिया था। बाद में पूरे जिले की पुलिस और आला अफसर पीएसी के साथ घटना स्थल पर पहुंच कर लोगों को किसी तरह शांत करा कर आगे की कार्रवाई की थी।
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