बाल कल्याण समिति के अध्य्क्ष विनोद तिवारी में बताया कि बच्ची मिलने की सूचना मिली है। उसके स्वास्थ में सुधार है। फिलहाल करीब पांच दिनों तक बच्ची अस्पताल में रहेगी। उसके बाद चिकित्सकों द्वारा बच्ची का फिटनेश जारी किया जाएगा, तो बच्ची को देखरेख करने के लिए दस्तक इकाई गोरखपुर में रखा जाएगा। जहां पर बच्ची 60 दिनों तक रहेगी। उसके बाद बच्ची को गोद लेने के लिए प्रकाशन किया जाएगा। अगर प्रकाशन के बाद भी बच्ची के माता पिता उसे दस्तक इकाई नहीं ले जाते हैं तो कोर्ट द्वारा आवेदन किए हुए व्यक्ति को कागजी कार्रवाई के साथ सौंप दिया जाएगा।
योजनाएं हजार फिर भी बेटियां लाचार
बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान का प्रचार होने के बाद भी कुछ लोगों की दोहरी मानसिकता सामने आ रही है। निचलौल सिंदुरिया मार्ग स्थित मधुबनी नहर पुल के पास नवजात को छोड़ने के मामले में ऐसा ही कुछ देखने को मिला। बेटी के जन्म से लेकर पढ़ाई लिखाई और शादी तक के लिए सरकार की तरफ से भरपूर मदद दी जा रही है।
योजनाओं के बारे में बताते हुए सीएचसी अधीक्षक डॉ. राजेश द्विवेदी ने कहा कि सुकन्या समृद्धि योजना के तहत 10 वर्ष तक की बच्ची का किसी बैंक या पोस्टऑफिस में खाता खुलवाकर उसमें हर महीने 250 रुपये न्यूनतम जमा किए जा सकते हैं। सालाना डेढ़ लाख रुपये तक खाते में जमा किये जा सकते हैं।
बच्ची को 18 या फिर 21 वर्ष की आयु पर रकम को ब्याज के साथ निकाला जा सकता है। कन्या सुमंगला योजना के तहत एक अप्रैल 2019 के बाद जन्मी बेटियों को 15 हजार रुपये तक दिए जाएंगे। जननी सुरक्षा योजना के तहत बेटी को जन्म देने के बाद तीन किस्तों में पांच हजार मिलते हैं।