कई ऐसे मामले भी सामने आए हैं जिसमें जमानत पर रिहा होने के बाद बदमाश गवाह या फिर वादी को धमकी देते हैं कि वह सुलह कर लें, केस वापस लें। ऐसे मामलों की भी पुलिस जांच करेगी और इस तरह के मामले जहां पर भी सामने आएंगे पुलिस को तत्काल नया केस दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेजने का आदेश भी एसएसपी ने दिया है।
थानेदार, दरोगा की चरित्र पंजिका भी इसी से तय होगी
एसएसपी का मानना है कि तबादला होने के बाद अफसरों से यह लोग चरित्र पंजिका में गुड वर्क अंकित करा लेते हैं। ऐसे में काम करने वाले और बिना काम करने वाले पुलिस वाले एक ही श्रेणी में आ जाते हैं। अब ऐसा नहीं होगा। सभी थानेदार, दरोगा की चरित्र पंजिका वह खुद लिखेंगे और किसी भी सूरत में इसमें गड़बड़ी नहीं होगी। जो काम करने वाले होंगे उन्हें ही गुड वर्क करने का तमगा मिलेगा।
पुलिस को डकैती, लूट, चोरी के जिन बदमाशों का सत्यापन करना है उसमें अभी 1465 नाम सामने आए हैं। इनमें कोतवाली थाने में 50, राजघाट में 44, तिवारीपुर में 54, कैंट थाने में 46, खोराबार में 109, रामगढ़ताल में 62, गोरखनाथ में 79, शाहपुर में 137, कैंपियरगंज में 18, पीपीगंज में 42, चिलुआताल में 109, सहजनवां में 79, गीडा में 53, चौरीचौरा में 71, झंगहा में 65, पिपराइच में 49, गुलरिहा में 61, बांसगांव में 37, गगहा में 47, बेलीपार में 40, गोला में 45, बड़हलगंज में 35, उरूवा बाजार में 22, बेलघाट में 32, खजनी में 32, सिकरीगंज में 30 और हरपुर बुदहट में 17 बदमाशों के नाम सामने आए हैं।
डीआईजी/एसएसपी जोगेंद्र कुमार ने बताया कि दस साल में डकैती, चोरी, लूट में जेल भेजे गए बदमाशों का सत्यापन किया जाना है। अगर जमानत पर बाहर आने के बाद वह सुधर गए तो सिर्फ निगरानी की जाएगी नहीं तो कार्रवाई होगी। पुलिस घर जाकर सत्यापन करेगी कि वे अब क्या कर रहे हैं। पुलिस वालों के चरित्र पंजिका में भी गुडवर्क करने वालों के ही दर्ज होंगे। जमानत पर बाहर आए बदमाश दोबारा वारदात करते मिले तो संबंधित थानेदार, बीट दरोगा की सीधी जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाएगी।