चुनाव से पूर्व मुंबई में चले जाने के कारण उनकी लाइसेंसी बंदूक जमा नहीं हो सकी। बताया जा रहा है कि पिता का पुत्रियों के प्रति ज्यादा लगाव था। दूसरी पुत्री को ट्रैक्टर-ट्राली आदि दे देना बेटों से तनाव का कारण बना था। वर्तमान में पुत्रों द्वारा कार को पट्टीदारों के माध्यम से घर से हटवा दिया गया था।
बेटे भी करते हैं पेंट-पालिश का कारोबार
कुछ वर्ष पहले लालधर ने अपने नाम से बंदूक के लिए लाइसेंस लिया था। उनके दोनों बेटे सदानंद (55 वर्ष) व दयानंद (50 वर्ष) सपरिवार पुणे में ही रहकर पेंट-पॉलिश का कारोबार करते हैं। इन दिनों लालधर निषाद व उनकी पत्नी फूलमती घर पर ही रह रहे थे। लॉकडाउन से पहले यह अपने इलाज हेतु पत्नी के साथ पूना गए जहां दोनों बेटों ने इनका कोई सहयोग नहीं किया। फिर वे अपनी छोटी बेटी सुनीता के पास मुंबई चले आए। लॉकडाउन के दौरान ही वह निजी गाड़ी से अपनी छोटी बेटी संगीता के गांव महसी वापस आए। जहां से खोराबार के सिक्टौर में रह रही अपनी बड़ी बेटी निर्मला के ससुर के ब्रह्मभोज में गए थे। सिक्टौर से सात दिन पहले ही बेलीपार गांव आए थे।
पट्टीदार को सौंप दी थी घर की चाबी
पत्नी एवं बेटियों का आरोप है कि बेटे अपने पट्टीदारों को गेट तथा गाड़ी की चाबी दे दिए थे तथा कमरों में भी ताला बंद कर दिए थे। इसपर छोटे बेटे दयानंद से लालधर की मोबाइल पर वीडियो कॉल के जरिये काफी देर तक बहस हुई थी। उसके बाद वह काफी तनावग्रस्त हो गए थे। बेलीपार पुलिस बंदूक को कब्जे में लेकर जांच में जुटी है।