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पूर्वांचल में नक्सली के पांव पसारने की आशंका, एटीएस ने मांगी रिपोर्ट

Thu, 28 May 2020 09:39 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

  • एटीएस ने दस साल पहले पकड़ी गई नक्सली महिला की रिपोर्ट मांगी
  • शाहपुर में पकड़ी गई थी नक्सल से जुड़ी महिला, बरामद हुआ था नक्सल साहित्य
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ats
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एक बार फिर पूर्वांचल में नक्सली गतिविधियों के पांव पासारने की खुफिया रिपोर्ट है। इस रिपोर्ट के बाद एटीएस ने गोरखपुर में दस साल पहले शाहपुर इलाके में पकड़ी गई महिला के बारे में जानकारी मांगी है।

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गोपनीय पत्र में एटीएस ने महिला के बारे में हुई कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट गोरखपुर पुलिस से मांगी है। खबर है कि महिला की गिरफ्तारी से जुड़े अभिलेख पुलिस ने खोजना शुरू कर दिया है। हालांकि मामला एक दशक पुराना होने की वजह से इसमें काफी मुश्किल पेश आ रही है।

गोपनीय रिपोर्ट होने की वजह से अफसर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, शाहपुर पुलिस ने 7 फरवरी 2010 मे नक्सली साहित्य के साथ एक महिला को रेलवे डेयरी कालोनी के पास से पकड़ा था। उसकी पहचान छपरा, बिहार के एकमा थाना क्षेत्र में तिलकारा गांव निवासी आशा हीरमनी के रूप में हुई थी।

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पहले भी हो चुकी है गिरफ्तार

पूछताछ में आशा हीरामनी ने बताया था कि उसका बेटा तब शाहपुर के कृष्णानगर प्राइवेट कॉलोनी में किराए का कमरा लेकर रहता था। यह भी पता चला था कि वह बेटे से मिलने ही आई थी और रास्ते में पुलिस ने दबोच लिया।

आशा हीरामनी के नक्सली गतिविधियों में लिप्त होने के साथ ही बिहार और छत्तीसगढ़ के नक्सली संगठनों के महिला विंग की अहम पदाधिकारी होने का पता चला था। आशा का पति बलराज उर्फ बच्चालाल उर्फ बिलार उर्फ अरविंद के भी नक्सली गतिविधियों में लिप्त होने तथा बिहार के नक्सली संगठन में प्रमुख पद पर होने का पता चला था।

आशा हीरामनी की गिरफ्तारी के कुछ माह बाद रेलवे स्टेशन रोड से उसके एक रिश्तेदार को भी नक्सल साहित्य के साथ गिरफ्तार किया गया था। बाद में आशा और उसके पति के संगठन से जुड़े कुछ लोग देवरिया जिले में भी गिरफ्तार किए गए थे। आशा हीरामनी के बारे में पूरी जानकारी मांगी गई है। तब पुलिस ने इसकी पूरी जांच नहीं की थी।

 
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