पूछताछ में आशा हीरामनी ने बताया था कि उसका बेटा तब शाहपुर के कृष्णानगर प्राइवेट कॉलोनी में किराए का कमरा लेकर रहता था। यह भी पता चला था कि वह बेटे से मिलने ही आई थी और रास्ते में पुलिस ने दबोच लिया।
आशा हीरामनी के नक्सली गतिविधियों में लिप्त होने के साथ ही बिहार और छत्तीसगढ़ के नक्सली संगठनों के महिला विंग की अहम पदाधिकारी होने का पता चला था। आशा का पति बलराज उर्फ बच्चालाल उर्फ बिलार उर्फ अरविंद के भी नक्सली गतिविधियों में लिप्त होने तथा बिहार के नक्सली संगठन में प्रमुख पद पर होने का पता चला था।
आशा हीरामनी की गिरफ्तारी के कुछ माह बाद रेलवे स्टेशन रोड से उसके एक रिश्तेदार को भी नक्सल साहित्य के साथ गिरफ्तार किया गया था। बाद में आशा और उसके पति के संगठन से जुड़े कुछ लोग देवरिया जिले में भी गिरफ्तार किए गए थे। आशा हीरामनी के बारे में पूरी जानकारी मांगी गई है। तब पुलिस ने इसकी पूरी जांच नहीं की थी।