20 से 25 हजार रुपये आता है खर्च
गोरखपुर से गायब ज्यादातर लड़कियां हैदराबाद और मुंबई में मिली हैं। इन्हें वापस लाने वाले पुलिसकर्मी बताते हैं कि इनको बरामद कर, वापस लाने में कम से कम 20 से 25 हजार रुपये का खर्च आता है। जिस लड़की के माता-पिता सक्षम हैं, वे तो अपनी इज्जत बचाने और बेटी को जल्द बरामद करने के लिए पुलिस टीम के आने-जाने का खर्च और गाड़ी का इंतजाम कर देते हैं। नहीं तो विवेचक इसके लिए गलत-सही रास्तों से खर्चों का इंतजाम करता है। लोकेशन ट्रेस होने के बाद जब टीम उसे बरामद करने के लिए जाती है तो पहली बार में अगर लड़की मिल गई तो ठीक, नहीं तो यह खर्च और बढ़ता जाता है।
केस मिलते ही सकते में आ जाते हैं पुलिसकर्मी
यही एक ऐसा केस है, जिसकी विवेचना कोई पुलिसकर्मी नहीं करना चाहता। केस मिलते ही विवेचक सकते में आ जाते हैं और उनकी कोशिश होती है कि किसी तरह से केस से छुटकारा मिल जाए। अगर उन्हें लाइन हाजिर करने को कोई अफसर बोल दे तो बचाव की भी कोशिश नहीं करते हैं। लेकिन, ऐसा कितने दिन हो सकता है, इस वजह से पुराने हो चुके दरोगा इस काम को कैसे करना है, सीख चुके हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने जाहिर की थी नाराजगी
बेलीपार इलाके से एक किशोरी लापता हो गई थी। केस दर्ज होने के बाद उसकी लोकेशन दिल्ली में मिली थी, मगर इसी बीच पीड़िता के परिजन सुप्रीम कोर्ट चले गए। सुप्रीम कोर्ट ने गोरखपुर पुलिस को फटकार लगाते हुए मामले की विवेचना दिल्ली पुलिस के सुपुर्द कर दी। इसके बाद किशोरी मिल गई थी। मामले में विवेचक पर कार्रवाई एसएसपी ने की थी। इसके बाद से पुलिस, जहां-तहां से पैसों का इंतजाम करके बरामदगी करने में अपना भला समझती है।
इस वजह से ट्रांजिट रिमांड से बचती है पुलिस
अगर पुलिस किशोरी को बरामद करने पर गैर जनपद में गिरफ्तारी दिखा देगी तो उसे, वहीं की कोर्ट में पेश करना होगा। इसके लिए केस डायरी और अन्य कागजात की औपचारिकता करनी होती है। कोर्ट में पेश करने पर मजिस्ट्रेट एक निर्धारित समय देते हैं। उसी समय पर किशोरी को फिर घटना वाली जगह की स्थानीय कोर्ट में पेश करना होता है। कागजी कार्रवाई और औपचारिकता से बचने के लिए पुलिस इस चक्कर में नहीं पड़ना चाहती है। सबसे बड़ी दिक्कत यह होती है कि कागजी कार्रवाई में थोड़ी भी कमी मिली तो आरोपित को वहीं पर दाखिल करना पड़ता है और प्रक्रिया जटिल हो जाती है।
एसएसपी डॉ. विपिन ताड़ा ने कहा कि निर्धारित भत्ते के हिसाब के नियमानुसार भुगतान किया जाता है। विवेचना फंड भी उपलब्ध कराया जाता है। कहीं कोई दिक्कत है तो इसकी जानकारी कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।