दोनों अफसरों ने बताया कि पुलिस ने शराब की बोतल के बार कोड व अन्य स्रोतों से जांच आगे बढ़ाई तो पता चला कि तहसील प्रशासन की टीम ने लगभग डेढ़ साल पहले गांव की एक जमीन की पैमाइश की थी। इसमें जल जीवन मिशन के तहत पानी की टंकी के लिए जगह को सुरक्षित किया गया था। कीमती जमीन रामजीत यादव और उसके परिजनों के कब्जे में थी, जिसका वह लगातार विरोध करता था और पूर्व में पैमाइश के लिए आए राजस्व कर्मी से विवाद किया था, इसका केस भी दर्ज है।
बताया जा रहा है कि रामजीत यादव, उसका लड़का महेंद्र, भतीजा पन्नेलाल व योगेंद्र पैमाइश के दौरान विवाद कर मिट्टी का तेल डालकर जलाने व स्वयं जलकर सभी लोगों को फंसाने की बात पहले भी गांव वालों के सामने कर चुके थे। इसी बीच एक जमीन के रुपये को लेकर विवाद भी परिवार में सामने आ गया।
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पता चला कि रामजीत यादव, अयोध्या यादव व सुरेंद्र की मां मैना देवी की जमीन बेचने के लिए स्वयं सौदा किया था और प्रापर्टी डीलर से दो जमीन के बैनामा व एक जमीन की एग्रीमेंट की बात कही थी। उसने स्वयं व अयोध्या की जमीन को बैनामा करके एक करोड़ 19 लाख रुपये ले लिए। मैना देवी के खाते में 27 लाख रुपये डलवा कर जमीन के एग्रीमेंट का दबाव बना रहा था। इसका सुरेंद्र व मैना देवी विरोध कर रही थीं।
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इधर, प्रापर्टी डीलर लगातार रामजीत यादव पर जमीन एग्रीमेंट करवाने के लिए दबाव बना रहा था। परिवार में विवाद बढ़ने पर सबने मिलकर हत्या की साजिश रची। फिर साजिशन सभी मिल गए और रामजीत ने भतीजे योगेंद्र, पन्नेलाल व महेंद्र को शराब पिलाई। घटना वाले दिन भी गांव में महेंद्र के घर पर रामजीत आकर रुका और योगेंद्र को शराब पिलाकर अपने लड़के के साथ भेजकर सुरेंद्र को शराब पिलाई। फिर सुरेंद्र को डंडे से मारा, जिससे वह सिर के बल गिर गया और बेहोश हो गया। इसके बाद साक्ष्य मिटाने के लिए जलाकर मार दिया व ग्राम प्रधान को नामजद करवा दिया।