एसपी क्राइम ने बताया कि अभी स्थानीय पुलिस जांच कर ही रही थी कि इसी तरह के मामले की जांच करने हैदराबाद की पुलिस गोरखपुर आ गई। पता चला कि इन्हीं आरोपियों ने कुछ और लोगों को हैदराबाद में नियुक्ति पत्र देकर ठगा है और वहां भी उनके खिलाफ जालसाजी का केस दर्ज है। जिसके बाद यहां की पुलिस ने मामले की जांच बंद कर दी।
एसपी क्राइम ने बताया कि जांज बंद होने के बाद विंध्यवासिनी दुबे हाइकोर्ट चली गईं। हाइकोर्ट ने तत्कालीन एसएसपी को क्राइम ब्रांच से समयबद्ध तरीके से जांच कराने का आदेश दिया। जांच सीओ क्राइम के नेतृत्व में क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर दिलीप सिंह को मिली।
जिसके बाद क्राइम ब्रांच की टीम ने पहले गिरोह के एक सदस्य लखनऊ निवासी अनिल कुमार सिंह को गिरफ्तार कर जेल भिजवाया था। सोमवार को गिरोह के दो अन्य सदस्यों संजय कुमार वर्मा व उसके भाई सुनील कुमार वर्मा को गिरफ्तार किया। क्राइम ब्रांच बिहार के छपरा निवासी गिरोह के सरगना समेत पांच आरोपियों की तलाश में जुटी है।
करीब पचास लोगों से ठगे हैं ढाई करोड़ रुपये
एसपी क्राइम ने बताया कि गिरोह का नेटवर्क कई राज्यों व यूपी के कई जिलों में फैला है। बिहार, तेलंगाना के साथ ही यूपी के बलिया, लखनऊ, सुल्तानपुर में भी ठगी के आरोप हैं। सिर्फ गोरखपुर में ही इस गिरोह ने चालीस से पचास लोगों को ठगी का शिकार बनाया है। उनसे करीब ढाई करोड़ रुपये की ठगी की गई है। उन्होंने बताया कि ये लोगों को अलग-अलग विभागों में नौकरी दिलाने अथवा ठेका दिलाने के नाम पर रकम लेते हैं। ट्रेनिंग भी कराते हैं और फर्जी नियुक्ति पत्र भी देते हैं।