अंत्येष्टि स्थल : 900 डिग्री सेल्सियस तापमान से होगा दाह संस्कार
गोरखपुर। राप्ती तट स्थित राजघाट पर गैस आधारित जिस शवदाह संयंत्र को लगाया जा रहा है, अंत्येष्टि के समय उसका तापमान बढ़कर 900 डिग्री तक पहुंच जाएगा। इसके लिए एक साथ 10 बीओटी सिलेंडर का इस्तेमाल किया जाएगा। दाह संस्कार में अधिकतम 10 से 12 किलो गैस की आवश्यकता होगी। ऐसे में इस संयंत्र से दाह संस्कार करना न सिर्फ इको फ्रेंडली होगा, बल्कि काफी किफायती भी होगा।
सामान्य तौर पर किसी वयस्क के दाह संस्कार में पांच से छह क्विंटल लकड़ी की आवश्यकता होती है, लेकिन नगर निगम की ओर से अंत्येष्टि स्थल के विकास के क्रम में राप्ती तट पर लकड़ी आधारित दो और गैस आधारित एक शवदाह संयंत्र लगाया गया है। इन संयंत्रों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पूरी तरह से इको फ्रेंडली हैं। यानी इन दोनों तकनीक से शवदाह करने में धुआं बिल्कुल बाहर नहीं निकलेगा। संयंत्र में स्क्रबर लगे हैं जिससे धुंए का शोधन होगा। दाह संस्कार के दौरान निकलने वाला धुआं स्क्रबर से होकर पानी के टैंक से गुजरेगा। इससे धुआं पूरी तरह से शुद्ध हो जाएगा।
एक साथ 10 सिलेंडर का किया जाएगा इस्तेमाल
गैस आधारित शवदाह संयंत्र में दाह संस्कार के वक्त एक साथ 10 सिलेंडरों की आवश्यकता पड़ेगी। दरअसल दाह संस्कार के वक्त तकरीबन 900 डिग्री सेल्सियस तापमान की जरूरत पड़ती है। एक सिलेंडर से इतना तापमान नहीं मिल सकता है। ऐसे में एक साथ 10 सिलेंडर से थोड़ी-थोड़ी गैस लेकर चेंबर तक पहुंचाई जाती है। ऐसा नहीं होने से गैस के जमने की समस्या हो जाती है।
सीएनजी के लिए भी तैयार किया गया सेटअप
संयंत्र लगाने वाली कंपनी के निदेशक संजीव गुलाटी ने बताया कि अभी एचपी कंपनी से उन्हें काफी मदद मिल रही है। कंपनी की ओर से इस संयंत्र के संचालन के लिए 47.5 किलोग्राम क्षमता के गैस सिलेंडर विशेष रूप से उपलब्ध कराए गए हैं। इसके साथ ही इस संयंत्र का सेटअप सीएनजी को भी ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। जब भी सीएनजी पाइप लाइन यहां तक पहुंचेगी तो उसी का इस्तेमाल किया जाएगा।