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कोरोना वायरस का छाया हुआ है खौफ, 53 बंदी आठ हफ्ते के पैरोल पर जेल से रिहा

Mon, 30 Mar 2020 11:58 AM IST
vivek shukla डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर।
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गोरखपुर जेल। - फोटो : अमर उजाला
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कोरोना के बढ़ते प्रकोप की वजह से मंडलीय कारागार में बंद 53 बंदियों को रविवार को भी आठ हफ्ते के पेरोल पर रिहा कर दिया गया। जेल पहुंचकर मजिस्ट्रेट ने इन्हें अंतरिम जमानत दी। जिसके बाद देर शाम पुलिस उन्हें दो गाड़ियों में लेकर रवाना हुई। ये सभी ऐसे बंदी हैं जिनको अभी सजा नहीं हुई है और वे ऐसे अपराध में बंद थे जिसकी सजा सात साल या उससे कम की है।
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शनिवार की देर रात भी पुलिस ने ऐसे ही 94 बंदियों को रिहा किया था। अबतक कुल 147 विचाराधीन बंदियों को रिहा किया जा चुका है। हालांकि अभी तक उन 27 सजायाफ्ता कैदियों को नहीं छोड़ा जा सका है, जिनको सात साल या उससे कम की सजा मिल चुकी है।

वहीं हत्या के आरोप में बंद आजीवन कारावास की सजा काट रहे साठ साल से अधिक उम्र के आदर्श कैदी सुदामा, वंशबहादुर और शेषनाथ की भी रिहाई नहीं हो सकी है। सोमवार को भी कुछ बंदियों व कैदियों की रिहाई हो सकती है।
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28 बंदियों को पुलिस ने रैन बसेरे में रखा, सुबह पहुंचाया

प्रदेश की सभी जेलों में ओवरलोडिंग से कोरोना फैलने की डर से सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद सरकार ने सात साल से कम सजा पाने वाले, साठ साल से अधिक उम्र के आजीवन कारावास के आदर्श कैदियों व सात साल से कम की सजा जैसे अपराध के आरोप में बंद विचाराधीन बंदियों की सूची मांगी थी। जिसके बाद गोरखपुर जेल प्रशासन ने सात साल या उससे कम सजा वाले 27 कैदियों, आजीवन कारावास के तीन आदर्श कैदियों व 167 विचाराधीन बंदियों की सूची भेजी थी।

शनिवार को सीएम ने प्रदेश के ऐसे 11 हजार कैदियों व बंदियों को रिहा करने का आदेश दिया था। जिसके बाद शनिवार को 94 विचाराधीन बंदियों को रिहा किया गया था। इसी क्रम में रविवार को 53 बंदियों को रिहा किया गया। इनमें से अधिकांश गोरखपुर के हैं, वहीं कुछ बंदी आजमगढ़, जौनपुर और देवरिया के भी है।

जेल प्रशासन ने गाड़ी मंगाकर 94 बंदियों को तो आठ सप्ताह के लिए शनिवार की देर रात छोड़ दिया लेकिन उसके बाद इन बंदियों को उनके घर तक पहुंचाने में पुलिस के पसीने छूट गए। पूरी रात इन बंदियों को पुलिस चार गाड़ियों में लेकर ढोती रही। यही नहीं करीब 28 बंदी आजमगढ़, कुशीनगर और दिल्ली के भी थे।

 
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लिहाजा पुलिस ने उन्हें रात भर रेलवे स्टेशन के एक धर्मशाला में रख कर भोजन दिया और रविवार की भोर में उन्हें लेकर रवाना हुई। वहीं पुलिस ने बाकी के 67 बंदियों को तीन रूट बनाकर उनके इलाके के थाने की पुलिस को सौंप दिया। उसके बाद थाने की पुलिस ने उन्हें प्रधानों की मदद से घर तक पहुंचाया। सुबह होते ही अपने चहेतों को देखकर परिजन खुश हो उठे। उन्हें आठ सप्ताह के लिए ही सही लंबे समय के बाद अपनों के साथ समय बिताने को मिलेगा।

गोरखपुर के अलग-अलग थानाक्षेत्रों के रहने वाले 67 बंदियों को पहुंचाने के लिए पुलिस ने तीन रूट तय किए। एक गाड़ी खोराबार, तिवारीपुु्र, शाहपुर के लिए निकली। एक गाड़ी बड़हलगंज, सहजनवां और खजनी रूट पर गई जबकि तीसरी गाड़ी पीपीगंज और कैंपियरगंज की ओर गई।

छूटने वाले शहर के शाहपुर के बंदियों में शिवपुर सहबाजगंज के नीरज कुमार, दिवाकर सिंह, बिछिया के मुन्ना पटेल, हनुमंत नगर के हंस कुमार, पादरी बाजार के अफरोज अहमद, बिछिया के अजय तिवारी शामिल हैं। वहीं 28 बंदी ऐसे थे जो कुशीनगर, आजमगढ़ के थे। एक बंदी दिल्ली का भी था। रात होने की वजह से पुलिस ने उन्हें रैन बसेरे में रखा और भोर में लेकर रवाना हुई। हालांकि सीओ गोरखनाथ रात में बंदियों के रोके जाने से इंकार करते हुए बोले कि सभी बंदियों को रात में ही उनके थाने के हवाले कर प्रधान की मदद से उनके घर पहुुंचा दिया गया है।
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