इसके अलावा लॉकडाउन के दौरान उपचार कराने वाले रोगियों के अनुभव के आधार पर रिपोर्ट तैयार की गई। अध्ययन अवधि के दौरान रोगियों के ओपीडी पंजीकरण में 94.5 प्रतिशत की गिरावट आई। मानसिक रोग विभाग की तरफ से शुरू की गई टेली-परामर्श सेवा के तीन महीने के दौरान ही 23.5 प्रतिशत लोगों के मानसिक रोग का उपचार किया गया। 21.4 प्रतिशत लोग विभिन्न प्रकार के सिरदर्द से परेशान थे। इसके अलावा 15.9 प्रतिशत मरीजों में अवसाद के लक्षण थे। 15.3 प्रतिशत को चिंता विकार और 8.8 प्रतिशत को द्विध्रुवी-प्रभावी विकार (किंतु-परंतु) था।
कोविड अस्पताल के चलते प्रभावित हुआ बीआरडी
कोरोना के दौरान बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ही कोविड का लेवल-3 अस्पताल था। मेडिकल कॉलेज में केवल इमरजेंसी मरीजों का इलाज किया जा रहा था। कोविड लेवल-3 के भय की वजह से सामान्य रोगी भी बीआरडी नहीं पहुंचे। इससे उनका इलाज नहीं हो पाया।
साथ ही बीआरडी के संसाधनों का भी उपयोग नहीं हो सका। शोध में यह बात भी सामने आई कि कोविड लेवल-3 अस्पताल इसी परिसर में होने की वजह से लोग अपने अन्य बीमारियों का इलाज कराने नहीं आए। इसका सीधा असर उनके मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ा।