उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में कोरोना वायरस के खिलाफ जंग जीतने में मासूम आगे हैं। युवाओं और बुजुर्गों के मुकाबले इनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर है। इसी का नतीजा है कि मासूम नाम मात्र की दवा और मां के दूध से ही ठीक हो जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि मासूमों के संक्रमण की रफ्तार कम है। अब तक महज एक से डेढ़ प्रतिशत मासूम ही संक्रमण का शिकार हुए हैं। इनकी उम्र तीन माह से लेकर 12 साल के भीतर रही है। खास बात यह है कि इनमें शत-प्रतिशत कोरोना से जंग जीते हैं। एक भी मासूम की मौत संक्रमण की वजह से नहीं हुई है। बीआरडी ने अब इस पर शोध करने का फैसला किया है। मौजूदा समय में 14 मासूम संक्रमित हैं और सभी होम आइसोलेशन में हैं।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज की बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. अनीता मेहता ने बताया कि करीब 70 से 80 मासूम ठीक होकर बीआरडी से घर जा चुके हैं। इनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत अच्छी रही है। यही वजह है कि इन्हें नाम मात्र की दवाएं दी गईं। बताया कि कुछ नवजात तो मां का दूध पीकर ही ठीक हो गए।
बीआरडी के प्राचार्य डॉ गणेश कुमार ने बताया कि मासूमों के ठीक होने की रफ्तार बुजुर्गों और युवाओं से भी अच्छी रही है। अब तक एक भी मासूम की मौत संक्रमण से नहीं हुई है। इस पर बीआरडी की टीम शोध करेगी।