बीआरडी मेडिकल कॉलेज में कोरोना के गंभीर मरीजों को अब टोसिलिजुमैब इंजेक्शन नहीं लगेगा। इस इंजेक्शन के इस्तेमाल पर मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने रोक लगा दी है।
वर्ल्ड हेल्थ आर्गनाइजेशन (डब्लूएचओ) व इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आइसीएमआर) के शोध में इंजेक्शन कोरोना मरीजों पर कम कारगर साबित हुआ है, जिसके बाद इस पर रोक लगाई गई है। इंजेक्शन के पूरे डोज की कीमत करीब 40 हजार रुपये है।
मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से बताया गया कि दवा जर्मनी की एक कंपनी ने बनाई है। कंपनी के अधिकारियों ने कुछ दिन पहले ही यह जानकारी डब्ल्यूएचओ और आईसीएमआर को दी थी। कंपनी ने बताया था कि दवा गंभीर मरीजों के इलाज में कारगर नहीं है।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. गणेश कुमार ने कहा कि डब्ल्यूएचओ व आईसीएमआर के अध्ययन के बाद यह बात साफ हो चुकी है कि टोसिलिजुमैब इंजेक्शन का कोरोना के मरीजों को कोई फायदा नहीं मिला है, इसलिए मेडिकल कॉलेज में इसका इस्तेमाल बंद कर दिया गया है। अब इंजेक्शन किसी मरीज को नहीं लगाया जाएगा। रोक से पहले दो मरीजों के उपचार के दौरान इस इंजेक्शन को लगाया गया था।