तीनों मरीजों की एहतियात के तौर पर कोरोना जांच कराई गई तो रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इसके बाद उनका इलाज शुरू किया गया और आंखों की दवा दी गई तो काफी हद तक राहत मिली। अब दोनों मरीजों की आंखों की लाली पूरी तरह से समाप्त हो गई है।
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ रजत कुमार के मुताबिक मरीजों की 50 फीसदी रोशनी चली गई थी। इलाज के बाद दोनों की आंखों की रोशनी आने लगी है। लेकिन इनका इलाज काफी लंबे समय तक चलेगा। डॉक्टर दोनों केस में शोध की बात कह रहे हैं।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. राम कुमार जायसवाल ने बताया कि जिनकी आंखों में खून के थक्के जमते हैं। उनकी आंखों की रोशनी भी हमेशा के लिए जा सकती है। ऐसा कार्निया थ्रोम्बोसिस के कारण होता है। ऐसे मरीजों को आंखों और सिर में दर्द के साथ धुंधला दिखाई देने लगता है। यह बेहद खतरनाक लक्षण है। ऐसे में जिन लोगों को इस तरह की समस्या हो रही है वह तत्काल डॉक्टर से संपर्क करें।