उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में कोरोना संक्रमण ने भयावह रूप ले लिया है। इस महामारी के बीच पंचायत चुनाव के कारण कई परिवार टूट कर बिखर गए। मतगणना में ड्यूटी करने के बाद तमाम लोग खुद को क्वारंटीन कर लिए हैं। अपने शरीर के एक-एक बदलाव पर नजर रखे हुए हैं ताकि कोई भी बदलाव दिखे तो कोरोना की जांच करा, समय से उपचार शुरू करा सकें।
रविवार और सोमवार को मतगणना के दौरान कई कर्मचारी संक्रमित मिले तो आनन-फानन उन्हें बदल कर दूसरे कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई। ड्यूटी के बाद तमाम कर्मचारियों ने स्वयं को क्वारंटीन किया। बुखार, सर्दी जुकाम और बदन दर्द की शिकायतें सामने आईं। कई लोग कोरोना का नए सिरे से टेस्ट करा रहे हैं। कर्मचारी संगठनों का दावा है कि आने वाले तीन चार दिनों में मतगणना में ड्यूटी करने वाले कर्मियों में काफी संख्या में संक्रमण सामने आएगा।
42 से अधिक शिक्षकों की कोरोना से मौत
शिक्षक संगठनों के दावे को माने तो अकेले गोरखपुर जिले में पंचायत चुनाव के दौरान 42 के करीब शिक्षामित्र, सहायक अध्यापक, प्रधानाध्यापक, लिपिक, लेखाकार का निधन हो चुका है। उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष प्रभाकर मिश्र एवं कार्यवाहक अध्यक्ष अमित कुमार मिश्र ने बताया कि पंचायत चुनाव में ड्यूटी के बाद जिले में 36 शिक्षकों की मौत हुई है।
अभी कई संक्रमित शिक्षकों का इलाज चल रहा है। इस सूची में शिक्षा विभाग के लिपिक, लेखाकार और माध्यमिक शिक्षकों को भी जोड़ लिया जाए तो यह संख्या 42 पार हो जाती है। फिलहाल यूनियन ने मुख्यमंत्री एवं डीएम को पत्र सौंप कर मृत शिक्षकों एवं कर्मचारियों के आश्रितों को 50 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति के साथ उन्हें अन्य सुविधाएं जल्द देने की अपील की है।