कोरोना के बढ़ते संक्रमण की मार उद्योगों पर पड़ने लगी है। जिन प्रदेशों में लॉकडाउन लगा है, वहां से उद्योगों को मिले ऑर्डर कैंसिल होने लगे हैं। दूसरी ओर, कच्चे माल की सप्लाई करने वाली कंपनियों ने क्रेडिट (उधारी) पर माल देना बंद कर दिया है। इस वजह से उद्यमियों को अपना उत्पादन कम करना पड़ा है।
जानकारी के अनुसार, इन दिनों दिल्ली, राजस्थान, मध्यप्रदेश आदि राज्यों में कोरोना संक्रमण की रफ्तार को कम करने के लिए एक सप्ताह से लेकर दो सप्ताह तक का लॉकडाउन लगाया गया है। ऐसे में निर्माण समेत अन्य तरह के कामकाज ठप हो गए हैं। इन राज्यों को भेजे जाने वाले उत्पादों से संबंधित उद्योगों के सामने परेशानी बढ़ गई है।
इसके अलावा विवाह समेत अन्य समारोहों पर भी रोक आदि की आशंकाओं से भी उद्योगों पर असर पड़ने लगा है। कई व्यापारियों ने अपने ऑर्डर आगे की तारीखों में बढ़ाना शुरू कर दिया है। आमतौर पर अभी सबके मन में केवल जिंदगी बचाने की ही प्राथमिकता है। अनिष्ट की आशंका में लोगों ने क्रेडिट पर माल की सप्लाई करने से मना करना शुरू कर दिया है।
साहू ग्रुप के एमडी सनूप साहू ने बताया कि गर्मी कूलर और पंखे का पीक सीजन होता है, लेकिन मार्केट ठप है। उत्पादों की सप्लाई बिहार में ज्यादा होती है, लेकिन वहां शादी समारोहों के बारे में चल रहे संशय की वजह से स्टॉकिस्टों ने ऑर्डर पर रोक लगा दी है। वहीं, हम लोग हर एक होल सेल व्यापारियों और स्टॉकिस्टों को दुकान पर न आने का सुझाव दे रहे हैं। जितना ज्यादा घर में रहेंगे, सुरक्षा उतनी ज्यादा होगी।
चेंबर ऑफ इंडस्ट्रीज के पूर्व अध्यक्ष एसके अग्रवाल ने बताया कि जिन राज्यों में लॉकडाउन लगा है उन राज्यों के स्टॉकिस्टों ने ऑर्डर कैंसिल करना शुरू कर दिया है। कई उद्यमियों के ऑर्डर रद्द करने संबंधी नोटिस आ चुके हैं। वजह यह है कि इस बार कोरोना बहुत घातक रूप में सामने आया है। आने वाले समय में स्थिति के और ज्यादा खराब होने की आशंका है। ऐसे में बाजार ठप पड़ता जा रहा है। कोई भी उद्यमी माल मंगाकर स्टॉक करना पसंद नहीं करेगा।
वीएन डायर्स के निदेशक विष्णु अजीत सरिया ने बताया कि मध्यप्रदेश, दिल्ली के बाजारों में मेरी फैक्ट्री से माल की सप्लाई होती थी। स्कूल भी सारे बंद चल रहे हैं। ऐसे में यूनिफार्म के लिए कपड़ों के लिए जो भी ऑर्डर थे, उन सभी को कैंसिल कर दिया गया है। ऐसे में फैक्ट्री चलाकर स्टॉक बनाते जाना संभव नहीं जान पड़ रहा है। फैक्ट्री को बंद करने की नौबत है। तीन से चार दिन ही फैक्ट्री और चला सकते हैं।