उन्होंने कहा कि मानसून की शुरूआत के साथ ही इंसेफेलाइटिस, कालाजार, डेंगू जैसी बीमारियों की भी दस्तक होने लगती है। इन सभी बीमारियों के इलाज में समय का काफी महत्व है। अगर समय रहते मरीज को स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचा दिया जाए तो इलाज मिल जाएगा और कोई बुरा परिणाम सामने नहीं आएगा। हालात तभी बिगड़ते हैं जब व्यक्त बुखार की दवा अपने आप लेने लगता है या किसी अप्रशिक्षित व्यक्ति के चक्कर में पड़ जाता है। जनसहयोग के बिना यह व्यवहार परिवर्तन संभव नहीं है।
उत्तर प्रदेश सरकार में सचिव वी. हेकाली झिमोमी ने पत्र भेज कर हेल्प डेस्क संचालन का दिशा-निर्देश दिया है। पत्र के अनुसार सीएचसी-पीएचसी के ओपीडी क्षेत्र में हेल्प डेस्क की स्थापना की जानी है। इस डेस्क पर इंफ्रारेड थर्मामीटर और पल्स आक्सीमीटर के साथ पैरामेडिकल स्टॉफ तैनात किये जाएंगे। हेल्प डेस्क पर बोर्ड लगा कर फ्लू और बुखार के रोगियों की पृथक स्क्रीनिंग की जाएगी। इस सुविधा से सभी को सुगम उपचार मिल सकेगा।
सीएचसी-पीएचसी पर ओपीडी के नियम
- मरीज की इंफ्रारेड थर्मामीटर से स्क्रीनिंग।
- एक रोगी के साथ मात्र एक तीमारदार की अनुमति।
- रोगी और तीमारदार के लिए मॉस्क अनिवार्य।
- जुखाम, खांसी, बुखार और सांस में तकलीफ वालों की पृथक जांच होगी।
- पंजीकरण काउंटर वाले व्यक्ति को ग्लब्स व मॉस्क पहनना अनिवार्य।
- ज्यादा ओपीडी होने पर एक से अधिक पंजीकरण काउंटर और फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन होगा।
- बीपी, शुगर के मरीजों को एक बार में एक माह की दवा देनी होगी।
- ओपीडी के बाहर भी फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन अनिवार्य।