लक्ष्मी मेटल इंडस्ट्रीज के एमडी मनोज अग्रवाल ने बताया कि गोरखपुर जिले में हर महीने सौ से 150 टन एल्युमिनियम के बर्तनों की खपत होती है, लेकिन पिछले दो महीने से इसमें कमी आई है। दरअसल, एल्युमिनियम के कच्चे माल की जरूरत देश में उपलब्ध संसाधनों से ही पूरी हो जाती है। लेकिन इसकी कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार से निर्धारित होती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में दो महीने पहले एल्युमिनियम 100 से 105 रुपये प्रति किलोग्राम में मिल जाता था, अब उसके लिए 125 से 130 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।
आर्डर आने के बाद ही तैयार कर रहे उत्पाद
नेशनल इलेक्ट्रिकल के एमडी हरिहर सिंह ने बताया कि जिन भी फैक्ट्रियों में 50 केवीए का लोड होता है, उन्हें खुद का ट्रांसफार्मर लगाना पड़ता है। हमारी कंपनी ऐसी फैक्ट्रियों में ट्रांसफार्मर उपलब्ध कराती है। लेकिन पिछले तीन महीने से हम मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। स्थिति यह है कि पहले के आर्डर पर घाटे में उत्पाद उपलब्ध करा रहे हैं। वजह यह है कि तीन महीने पहले कॉपर (तांबा) की कीमत 480 रुपये प्रति किलोग्राम थी, वह आज 750 रुपये हो गई है। ऐसे में अब आर्डर आने के बाद ही उत्पादन किया जा रहा है।