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Gorakhpur News: पूरे कार्यकाल में छाए रहे विवाद...एबीवीपी से मोर्चा लेना पड़ा भारी

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संवाद न्यूज एजेंसी
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गोरखपुर। गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेश सिंह के तीन साल का कार्यकाल विवादों से घिरा रहा। शिक्षक, कर्मचारी से लगायत छात्र तक विरोध में थे। कभी शुल्क की वृद्धि तो कभी छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर छात्रनेता आंदोलित रहे। प्रो. कमलेश गुप्त व कुछ शिक्षकों ने कुलपति के विरोध में उपवास तक रखा। हाल ही में एबीवीपी और कुलपति के बीच ऐसी ठनी कि मामला शासन से राजभवन तक पहुंच गया। माना जा रहा कि एबीवीपी की मुखालफत ही प्रो. राजेश सिंह को भारी पड़ गई।

कुलपति के लिए अंतिम पांच की सूची में नाम रहने के बाद भी उनके नाम पर राजभवन ने विचार नहीं किया। हालांकि, कुलपति रहते हुए प्रो. राजेश सिंह के खाते में कई उपलब्धियां भी रही हैं। विश्वविद्यालय को नैक का ए प्लस प्लस ग्रेड दिलाने में उनकी योजना और कौशल की तारीफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने भी की। अपने तीन साल के कार्यकाल में उन्होंने सेल्फ फाइनेंस कोर्स शुरू करके छात्रों को रोजगारपरक शिक्षा दिलाने की कोशिश भी की। लेकिन ये सारी उपलब्धियां काम नहीं आई और कुलपति के रूप में उनकी दूसरी पारी शुरू करने की हसरत धरी की धरी रह गई।
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लविवि के भौतिक विभाग की अध्यक्ष समेत महत्वपूर्ण पदों को संभाल चुकी हैं प्रो. पूनम टंडन



गोरखपुर। गोरखपुर विश्वविद्यालय की नवनियुक्त कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने लखनऊ विश्वविद्यालय में ही पढ़ाई व शोध में डिग्री हासिल की और फिर वहीं पर शिक्षक बनीं। वर्तमान में वह लखनऊ विश्वविद्यालय की भौतिक विज्ञान विभाग की अध्यक्ष हैं। इसके अलावा वह कई महत्वपूर्ण पदों को संभाल चुकी हैं।
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लखनऊ विश्वविद्यालय से वर्ष 1987 में बीएससी व वर्ष 1989 में एमएससी फिजिक्स की टॉपर रही हैं। वर्ष 1992 में उन्होंने पीएचडी की डिग्री हासिल की। वर्ष 1999-2000 में उनको मार्टिन लूथर यूनिवर्सिटी, हेले जर्मनी से फेलोशिप भी मिल चुका है। वह वर्ष 1991 से 1996 तक लेक्चरर, वर्ष 1996 से 2001 तक वह सीनियर लेक्चरर, वर्ष 2001 से 2006 तक रीडर और वर्ष 2006 में प्रोफेसर बनीं। वर्तमान में वर्ष 2018 से वह लखनऊ विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग की अध्यक्ष हैं। इसके अलावा वर्ष 2006 से एमआरएसआई-लखनऊ की फाउंडर सेक्रेटरी हैं। वर्ष 2007 से भौतिक विभाग के सभी प्रशासनिक निर्णयों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उनके निर्देशन में 37 छात्र शोध कर चुके हैं। वह लखनऊ विश्वविद्यालय की डीएसडब्ल्यू पद का दायित्व भी संभाल चुकी हैं। उनका 193 अंतरराष्ट्रीय व 9 राष्ट्रीय जनरल पेपर छप चुका है।
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