संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय का हीरक जयंती द्वार नए और भव्य स्वरूप में नजर आएगा। दीक्षांत समारोह में राज्यपाल व कुलाधिपति का परिसर में इसी द्वार से आगमन होगा। एक और प्रवेश द्वार बन जाने से अभी मुख्य प्रवेश द्वार पर लग रहे जाम से भी निपटा जा सकेगा। अतिथियों के भी आवागमन में असुविधा नहीं होगी।
विश्वविद्यालय की हीरक जयंती के उपलक्ष्य में 1.72 करोड़ रुपये की लागत से हीरक जयंती द्वार का निर्माण कराया जा रहा है। निर्माण कार्य अंतिम चरण में है और 30 जुलाई तक इसके पूरा होने की संभावना है। द्वार का निर्माण कार्य उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) करा रही है। परियोजना की स्वीकृत लागत जीएसटी सहित 1.72 करोड़ रुपये है। इसके सापेक्ष अब तक 1.63 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की जा चुकी है। पूरी परियोजना का खर्च विश्वविद्यालय अपनी निधि से वहन कर रहा है।
निर्माण कार्य अक्तूबर 2025 में शुरू हुआ था। अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल लगभग 70 प्रतिशत सिविल कार्य हो चुका है। फिनिशिंग, सौंदर्यीकरण और विद्युत संबंधी कार्य तेजी से कराए जा रहे हैं ताकि जुलाई के अंत तक द्वार का निर्माण पूरा हो सके।
परियोजना के तहत केवल भव्य प्रवेश द्वार ही नहीं बनाया जा रहा, बल्कि इसके बाईं ओर आधुनिक सोलर पार्किंग भी विकसित की जाएगी। इसके तैयार होने के बाद केंद्रीय पुस्तकालय के पास वर्तमान में संचालित पार्किंग को वहां से हटाकर नई पार्किंग में स्थानांतरित किया जाएगा। इससे मुख्य परिसर में यातायात व्यवस्था अधिक व्यवस्थित होगी और वाहनों के लिए सुरक्षित पार्किंग की सुविधा मिलेगी।