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Gorakhpur News: बिजली निगम की एक नासमझी, लाइनमैन की जान पर भारी- गंभीर अवस्था में चल रहा इलाज

Sun, 12 May 2024 12:33 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर

सार

बिजली निगम के कर्मचारी नेता अजय शाही ने बताया कि अगर निगम की तरफ से तकनीकी रूप से दक्ष लोगों को एसएसओ पद पर रखा जाता तो ये हादसा नहीं होता। सभी सैनिक कल्याण की तरफ से तैनात एसएसओ की शैक्षणिक योग्यता और तकनीकी परीक्षण की जांच हो। इसी आधार पर इन्हें तैनाती दी जाए।
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कर्मचारी नेता अजय शाही संग प्रदर्शन करते लाइनमैन और बिजलीकर्मी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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 झरना टोले में बिजली मरम्मत के दौरान आपूर्ति शुरू होने से झुलसे लाइनमैन नवीन चौधरी का बीआरडी मेडिकल कॉलेज के सर्जरी वार्ड में इलाज चल रहा है। भर्ती लाइनमैन की स्थिति नाजुक है। दूसरे दिन शुक्रवार को भी उनके कान से खून आता रहा। वहीं इस मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में एसएसओ को हटा दिया गया है।

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बिछिया क्षेत्र के सिंहासनपुर निवासी, संविदा लाइनमैन नवीन चौधरी के भाई सचिन चौधरी ने बताया कि न्यूरो और ईएनटी सर्जन देखेंगे, इसके बाद आगे के इलाज के बारे में बताएंगे। सिर की हड्डी टूट जाने के कारण कान से खून आ रहा है, जबकि गला, छाती, दाहिना पैर और हाथ झुलस गया है।

विद्युत उपकेंद्र नीना थापा के झरना टोला में शट डाउन के दौरान दूसरे फीडर की बिजली कटने के कारण यह हादसा हुआ। इस मामले में बिजली निगम ने एसएसओ की सेवा प्रदाता एजेंसी भूतपूर्व सैनिक कल्याण निगम को पत्र लिखकर एसएसओ को हटाने की सिफारिश की थी। शाम को सेवा प्रदाता एजेंसी ने एसएसओ को पद से हटाने की जानकारी निगम को दी।
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विभिन्न मांगों को लेकर बिजली निगम के कर्मचारियों ने मुख्य अभियंता कार्यालय पर प्रदर्शन किया। मुख्य अभियंता से वार्ता हुई। उनके आश्वासन और मांगे माने जाने के भरोसे के बाद प्रदर्शन खत्म किया। कर्मचारी नेता अजय शाही ने बताया कि अगर निगम की तरफ से तकनीकी रूप से दक्ष लोगों को एसएसओ पद पर रखा जाता तो ये हादसा नहीं होता।

सभी सैनिक कल्याण की तरफ से तैनात एसएसओ की शैक्षणिक योग्यता और तकनीकी परीक्षण की जांच हो। इसी आधार पर इन्हें तैनाती दी जाए।

अर्थिंग चेन होती तो नहीं होता हादसा
बिजली निगम के अधिकारियों के अनुसार अर्थिंग चेन होती तो नवीन चौधरी हादसे के शिकार नहीं होते। अर्थिंग चेन लाइनमैन के पास होती, तो वे बिजली जोड़ने से पहले तार को उसके ऊपर फेंकते तो स्पार्किंग से पता चल जाता है कि बिजली है। यदि बिजली होती थी तो ट्रिपिंग से आपूर्ति बंद हो जाती। इसके साथ ही ठेकेदारों की लापरवाह से श्रमिक हेलमेट और सेफ्टी बेल्ट आदि उपकरण के बिना ही मरम्मत कार्य कर रहे हैं।

अधिशासी अभियंता मोहद्दीपुर लवलेश कुमार ने बताया कि झुलसे लाइनमैन को बीआरडी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है, जहां बेहतर ढंग से इलाज कराया जा रहा है। इस मामले में लापरवाही करने वाले एसएसओ को हटा दिया गया है।
 

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