गोरखपुर। उत्तर प्रदेश राज्य अभिलेखागार और दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के मध्यकालीन इतिहास विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी और प्रदर्शनी का शुक्रवार को समापन हो गया। दूसरे दिन शोध पत्र प्रस्तुतिकरण, प्रश्नोत्तरी सत्र आदि का आयोजन किया गया।
दूसरे दिन भी भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के अनछुए पहलुओं की गूंज सुनी गई। विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। प्रस्तुत शोधपत्रों में भारत के स्वतंत्रता आंदोलन, उत्तर प्रदेश की भूमिका, स्थानीय आंदोलनों, गुमनाम नायकों एवं इतिहास लेखन की नवीन प्रविधियों पर विचार व्यक्त किए गए। स्वागत विभागाध्यक्ष प्रो. मनोज तिवारी, संचालन डॉ. आशीष कुमार सिंह व आभार ज्ञापन डॉ. सुनीता ने किया।
प्रदर्शनी देखने उमड़ी विद्यार्थियों की भीड़
राज्य अभिलेखागार की ओर से ब्रिटिशकाल के दौरान के कई तथ्यों को प्रदर्शित किया गया था। इसमें गोरखपुर समेत पूर्वांचल के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े तथ्य भी शामिल थे। प्रदर्शनी में सुबह से लेकर शाम तक छात्र-छात्राओं की भीड़ उमड़ी रही। इस दौरान उन्होंने कई ऐतिहासिक धरोहरों व गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में जाना।
विद्यार्थियों ने किया शैक्षणिक भ्रमण
डीडीयू और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने शुक्रवार को कुशीनगर व चौरीचौरा जैसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण किया। कुशीनगर में प्राचीन ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत का अवलोकन किया, वहीं चौरीचौरा में स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े प्रसंगों को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर प्राप्त हुआ।