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Gorakhpur News: सनातन संस्कृति में स्त्री केवल पूजनीय नहीं, सहगामिनी भी

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गोरखपुर। जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजीत गुप्त ने कहा कि सनातन वह है जो निरंतर प्रवाहमान एवं जीवंत है। स्त्री सृजनशीलता व विकास का स्रोत है। स्त्री परिवार और समाज की धुरी है। अगर परिवार उजड़ेगा तो समाज बिखर जाएगा। स्त्री केवल पूजनीय नहीं सहभागिनी भी है।
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प्रो. संजीत शनिवार को दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र विभाग की ओर सेे भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन सत्र को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यूरोप को विकास का मॉडल मानने से सनातन मूल्य की समझ कमजोर हुई।

दिग्विजयनाथ पीजी कॉलेज के प्राचार्य प्रो. ओम प्रकाश सिंह ने कहा कि समाज का प्रत्येक दौर आत्मावलोकन की मांग करता है। प्रधान पति जैसा संबोधन मौजूदा समय में नारी की स्थिति का सूचक कहा जा सकता है। जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ. अभिनव मिश्र ने कहा कि स्त्री सशक्तीकरण की चर्चा को ग्राम चौपाल तक ले जाने की जरूरत है। डीडीयू के वित्त अधिकारी जय मंगल राव ने कहा कि सनातन की प्राण शक्ति ही मातृशक्ति है। अध्यक्षता करते हुए कला संकाय की अधिष्ठाता प्रो. कीर्ति पांडेय ने कहा कि मौजूदा समय सशक्त स्त्री को पुनः सृजित करने का कालखंड है।
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स्वागत डॉ. दीपक गुप्ता, संचालन डॉ. रमेश चंद एवं डॉ. संजय तिवारी व आभार ज्ञापन डॉ. संजय राम ने किया। संगोष्ठी में प्रो. गौर हरि बेहरा, प्रो. सुनीता मुर्मू, डॉ. देवेंद्र पाल, डॉ. धर्मेंद्र सिंह, डॉ रंजन लता आदि मौजूद रहीं।
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