पुरानी व्यवस्था के तहत आईटीआई से पढ़ाई करने वाले विद्यार्थी जब कंपनी में काम करने जाते हैं तो उन्हें खुद को अपडेट करने में परेशानी होती है। इसकी एक वजह यह होती है कि आईटीआई में जिस उपकरण पर वे प्रैक्टिस करते हैं, वे बहुत पुराने हैं, जबकि कंपनी में आधुनिकतम मशीनों पर काम होता है।
इन राजकीय संस्थानों के विद्यार्थियों को मिल रहा प्रशिक्षण
राजकीय आईटीआई चरगांवा- देव इंडस्ट्रीज- 60 सीट, रेलवे सिग्नल वर्कशॉप- 80 सीट, साहु सिविंग मशीन- 60 सीट, स्मार्ट व्हील्स- 48 सीट, सुर्यांश एग्रो- 20, नरायण इंडस्ट्रीज- 20
महावीर जुट मिल्स- 40 सीट
राजकीय आईटीआई चौरीचौरा- सुर्यांश एग्रो इंडस्ट्रीज- 20 सीट, नरायण इंडस्ट्रीज-20 सीट, श्री सुदगुरु फैशन प्राइवेट लिमिटेड- 20 सीट, कौशिक बिवरेज- 20 सीट
राजकीय आईटीआई खजनी- श्री सद्गुरु फैशन प्राइवेट लि.- सिविंग टेक्नोलॉजी- 20 सीट
आईटीआई रेलवे कॉलोनी- शांति पेट- 20 सीट
आईटीआई बांसगांव- केयर मेडिकल डिवाइसेज-20
आईटीआई जेडी राजेश राम ने कहा कि गोरखपुर जिले के राजकीय आईटीआई में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को कोर्स पूरा करने के दौरान ही निजी कंपनियों में उच्च स्तरीय प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अत्याधुनिक मशीनों पर काम करके युवा जॉब रेडी बन रहे हैं। इससे उन्हें पढ़ाई पूरी करने बाद नौकरी के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।