शिकारा के संचालन को लेकर अभी संबंधित फर्म और जीडीए के बीच अनुबंध नहीं हुआ है, सिर्फ लाइसेंस जारी हुआ था। इसी पर प्राधिकरण ने घटना के अगले दिन सोमवार को फर्म को नोटिस देकर पूछा था कि बिना अनुबंध, ताल में शिकारा के संचालन पर क्यों न उनका लाइसेंस निरस्त कर दिया जाए।
जीडीए ने संचालक को नोटिस का जवाब देने के लिए तीन दिन का मौका दिया था। साथ ही शिकारा में टक्कर मारने वाली स्पीड बोट के संचालक को भी तय रुट से बाहर जाने पर चेतावनी दी थी। जीडीए की इस सख्ती के बाद सोमवार से ही शिकारा का संचालन बंद है। संचालक ने अपनी तीनों नाव ताल से हटा ली हैं।
शिकारा की घटना के बाद अब बरती जा रही है सावधानी
जेटी पर अलग-अलग प्लेटफार्म से शिकारा, स्पीड बोट, जेट स्की एवं पैडल बोट चलाने का लाइसेंस दिया गया है। शिकारा को छोड़कर सभी का अनुबंध भी हो चुका है। पर्यटन विभाग और जीडीए ने एक-एक फर्म को इसके संचालन का लाइसेंस जारी करने के साथ ही अनुबंध भी कर रखा है। शिकारा पलटने की घटना के बाद से ही दोनों फर्म सुरक्षा जैकेट समेत पूरी सतर्कता बरत रही हैं।
इमरजेंसी के लिए दोनों संचालकों के पास दो-दो मोटर बोट आरक्षित रखे गए हैं। इस तरह की सतर्कता कब तक जारी रहेगी यह आने वाला समय बताएगा क्योंकि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। इसके पहले भी घटना होने पर कुछ दिनों तक तो पूरी सतर्कता बरती जाती है फिर मामला ठंडा पड़ते ही लापरवाही शुरू हो जाती है।
एक साल पहले बिना अनुबंध के शुरू हुए जार्बिंग बाल में एक युवक की मृत्यु हो गई थी। इसी तरह सूरज ढलने के बाद मोटर बोट का संचालन होने को लेकर कई बार शिकायतें मिल चुकी हैं। मछली का ठेका लेने वाले भी मोटर बोट संचालक के खिलाफ कई बार शिकायत कर चुके हैं कि वे तय दायरे से आगे तक मोटर बोट लेकर चले आते हैं।
जीडीए सचिव राम सिंह गौतम ने कहा कि कमिश्नर ने भी घटना का संज्ञान लेते हुए रिपोर्ट मांगी है, जिसे तैयार किया जा रहा है। शिकारा संचालक का जवाब आ गया है। सोमवार तक इसपर निर्णय होगा। साथ ही कमिश्नर को भी पूरी रिपोर्ट उपलब्ध करा दी जाएगी। लोगों की सुरक्षा जीडीए की पहली प्राथमिकता है।