गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों में शोध परियोजना और मौखिक परीक्षा की व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। स्नातक व परास्नातक में अप्रायोगिक विषयों की शोध परियोजना व मौखिक परीक्षा अब कॉलेज अपने शिक्षकों से ही कराएंगे। इसे सत्र 2024-25 से ही लागू कर दिया गया है।
विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता कला संकाय प्रो. राजवंत राव ने इसका प्रस्ताव तैयार किया था। इसे लेकर परीक्षा समिति की बैठक आठ मई को हुई थी। विश्वविद्यालय की ओर से जारी आदेश के मुताबिक विश्वविद्यालय और कॉलेजों में अप्रायोगिक विषयों के संस्थागत और व्यक्तिगत परीक्षार्थियों की मौखिकी परीक्षा और शोध परियोजना के मूल्यांकन अब आंतरिक व्यवस्था से कराए जाएंगे। अब मनमाने अंक देने में भी अंकुश लगेगा। यदि किसी परीक्षार्थी को शोध परियोजना या मौखिकी परीक्षा में 80 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त होते हैं तो संबंधित आंतरिक परीक्षक को आख्या प्रस्तुत करनी होगी, जिससे दिए गए अंकों का औचित्य सिद्ध हो सके।