अब मालगाड़ी के वैगन और ट्रेनों के कोच को खोजने में रेलवे प्रशासन को ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ेगी। कंप्यूटर पर बस एक क्लिक दबाते ही सारा ब्यौरा उनके सामने होगा। यह संभव होगा आरएफआईडी यानी कि रेडियो फ्रिक्वेंसी इंटेलिजेंस डिटेक्शन से।
रेलवे ने इस पर काम करना शुरू कर दिया है। इस योजना के तहत हर एक मालगाड़ी के वैगन और ट्रेनों के कोच की टैगिंग की जाएगी। उस पर क्यूआर कोड दिया जाएगा। स्टेशन और यार्ड पर स्कैनर लगाए जाएंगे, जो मालगाड़ी या ट्रेन के आते ही क्यूआर कोड को स्कैन करके कंप्यूटर को कोच या वैगन का डिटेल बता देगा। कब, किस रूट से और किस स्टेशन से होकर गुजरी है।
पहले चरण में मालगाड़ी को लेकर काम किया जा रहा है। 2022 तक सभी मालगाड़ी के वैगन की टैगिंग कर दी जाएगी। इसके बाद कोच का लक्ष्य तय किया जाएगा। रेलवे में इस नई व्यवस्था से वैगन को खोजने में दिक्कत नहीं होगी और जरूरत के हिसाब से अगर दूसरे जोन में भी वैगन गए हैं तो उन्हें मंगाने में आसानी होगी।
पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पंकज कुमार सिंह ने बताया कि रेलवे में मालगाड़ी के बैगन की टैगिंग शुरू कर दी गई है। दिसंबर 2022 तक का लक्ष्य दिया गया है। इससे रेल प्रशासन को ट्रेनों और मालगाड़ी के संचालन में काफी आसानी होगी।