गोरखपुर गोलघर की दुकानों को किस रंग में रंगा जाए, यह जीडीए में व्यापारियों की बैठक में भी नहीं तय हो पाया। अब मुख्यमंत्री की सहमति के बाद ही दुकानों के रंग पर अंतिम मुहर लगेगी। व्यापारियों का एक पक्ष दुकानों को क्रीम तो दूसरा भगवा रंग में रंगने की पैरवी कर रहा है।
गोलघर को लखनऊ के हजरतगंज की तर्ज पर विकसित करने में आ रहे अवरोधों को दूर करने के लिए बुधवार को जीडीए उपाध्यक्ष की मौजूदगी में गोलघर के व्यापारियों की बैठक हुई। इस दौरान नगर आयुक्त अंजनी कुमार सिंह और मुख्य अभियंता नगर निगम सुरेश चंद के अलावा गोलघर उद्योग व्यापार मंडल के संगठन मंत्री रविंद्र कुमार मौर्या और गोलघर व्यापार मंडल के अध्यक्ष अभिषेक शाही मौजूद थे।
बैठक शुरू होते ही रविन्द्र मौर्या ने गोलघर के बाहर के व्यापारी नेताओं की मौजूदगी पर आपत्ति जताई । उनका आरोप था कि एक संगठन के प्रांतीय अध्यक्ष रमेश चंद गुप्ता अपने समर्थकों के साथ हंगामा करने के उद्देश्य से सभागार में उपस्थित थे। बैठक शुरू हुई तो रविन्द्र मौर्या ने कहा कि पूर्व में तय हुआ था कि दुकानें क्रीम रंग में रंगी जाएंगी। करीब 40 फीसदी दुकानें इसी रंग में रंगी भी जा चुकी हैं। ऐसे में दुकानों को भगवा रंग में रंगा जाता है तो क्रीम रंग पर हुए खर्च को कौन वहन करेगा। रंग को लेकर शुरू हुआ विवाद सुंदरीकरण कार्य को विवादित करने की कोशिश है।
गोलघर व्यापार मंडल के अध्यक्ष अभिषेक शाही ने कहा कि गोलघर मार्केट की दुकानों को भगवा रंग तथा पीला रंग के कांबिनेशन में रंगना चाहिए। साइन बोर्ड का साइज दुकान में बोर्ड के लिए उपलब्ध स्थान के अनुसार लगाया जाना चाहिए। विवाद को देखते हुए मुख्यमंत्री से रंग को अनुमोदित कराने का प्रस्ताव रखा गया जिसपर दोनों पक्ष राजी हो गए। बैठक में अधिशासी अभियंता किशन सिंह, प्रशांत मणि त्रिपाठी, गौरी शंकर सरावगी, संजय जालान, अवनीश शर्मा , मनीष जालान आदि उपस्थित रहे।
जीडीए उपाध्यक्ष अनुज सिंह ने कहा कि बैठक में तय हुआ कि आर्किटेक्ट की मदद से अलग-अलग तीन-चार रंग में रंगी गोलघर की दुकानों का डिजाइन तैयार कर मुख्यमंत्री के सामने प्रस्तुत किया जाए। मुख्यमंत्री द्वारा सुझाए रंग से ही गोलघर की दुकानें रंगी जाएंगी।