सीएम योगी कल करेंगे नवीन विग्रहों की प्राण प्रतिष्ठा
मंदिर में चल रही कथा का सीएम ने किया रसपान
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को गोरखनाथ मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा ज्ञान यज्ञ व श्रीलक्ष्मीनारायण महायज्ञ में शामिल हुए। इन दोनों अनुष्ठानों की पूर्णाहुति रविवार को होगी। अनुष्ठान पूर्णता के साथ ही मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ मंदिर परिसर में नवनिर्मित नौ नवीन मंदिरों में देव विग्रहों की प्राण प्रतिष्ठा करेंगे।
गोरखनाथ मंदिर पहुंचते ही सीएम योगी ने गुरु गोरखनाथ का दर्शन पूजन करने के बाद अपने गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की समाधिस्थली पर जाकर मत्था टेक उनका आशीर्वाद लिया। मंदिर में देव विग्रहों की प्राण प्रतिष्ठा के उपलक्ष्य में विगत 15 मई से सप्त दिवसीय श्रीलक्ष्मी नारायण महायज्ञ एवं श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन चल रहा है। इन दोनों अनुष्ठान का शुभारंभ मुख्यमंत्री की उपस्थिति में हुआ था। अनुष्ठान के पांचवें दिन पहुंचे मुख्यमंत्री ने शुक्रवार सायंकाल श्रीलक्ष्मीनारायण महायज्ञ की यज्ञशाला पहुंचे और चारों वेदों के नाम पर बने द्वारों और वेदी का पूजन करने के बाद यज्ञ में आहुतियां डालीं।
इसके बाद वह महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में सम्मिलित हुए। कथा का रसपान करने के बाद उन्होंने व्यासपीठ की आरती उतारी और सबके मंगलमय जीवन की कामना की। मुख्यमंत्री ने अनुष्ठान में सम्मिलित होने आए साधु संतों से भी मुलाकात कर उनका अभिनंदन किया।
जो सब को अपनी ओर खींच ले वह कृष्ण : डॉ. श्याम सुंदर
गोरखपुर। गोरखनाथ मंदिर में मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा के मौके पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन कथा व्यास ने भगवान के नामकरण का वर्णन करते हुए बताया कि प्रसिद्ध ज्योतिषी गर्गाचार्य के द्वारा भगवान का नाम कृष्ण रखा गया। कहा कि जो सब को अपनी ओर खींच लेता है वो कृष्ण होता है। कालीनाग से भगवान के संवाद का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान ने नाग पत्नियों की प्रार्थना पर उसको प्राण-दान कर कहते हैं कि या तो तुम विष वमन करना छोड़ दो या अपने रमण-द्वीप चले जाओ। क्योंकि राष्ट्र द्रोही व्यक्ति या तो राष्ट्र की संस्कृति के अनुरूप आचरण करें या तो देश छोड़कर चला जाए, तो इस प्रकार कालिया अपने द्वीप चला गया। कथा व्यास ने भगवान कृष्ण की विभिन्न लीलाओं को सुनाकर भक्तों को भक्ति भाव से विभोर कर दिया। संवाद