कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने बताया कि सौर ऊजा परियोजनाओं के 2022 तक के तय लक्ष्य को दो हिस्सों 6400 मेगावाट यूटीलिटी स्केल सौर विद्युत परियोजनाओं एवं 4300 मेगावाट रूफटॉप सोलर पावर प्लाण्ट की स्थापना में बांटकर पूरा किया जाएगा।
बिडिंग के माध्यम से 1122 मेगावाट क्षमता की सौर पावर परियोजन ाएं आवंटित की जा चुकी है। इनमें 500 मेगावाट क्षमता की परियोजनाओं की कमिशनिंग मार्च 2021 तक हो जाएगी। यही नहीं, ओपेन एक्सेस के तहत तृतीय पार्टी सेल-कैप्टिव उपयोगार्थ 900 मेगावाट क्षमता की परियोजना के आवंटन की प्रक्रिया चल रही है। प्रदेश में निजी विकासकर्ताओं द्वारा 969 मेगावाट क्षमता की यूटीलिटी स्केल सौर विद्युत परियोजनाओं की स्थापना की गई है।
बुंदेलखण्ड में बनाएंगे ग्रीन एनर्जी कॉरीडोर
मुख्यमंत्री ने प्रदेश के भीतर सौर ऊजा को लेकर बनी रणनीति को साझा करते हुए बताया कि बुन्देलखण्ड क्षेत्र में सौर विद्युत परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए 4000 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए ग्रीन एनर्जी कॉरीडोर का निर्माण किया जाएगा। इस कॉरीडोर में उत्पादित ऊर्जा की निकासी के लिए पारेषण तंत्र के विकास पर लगभग 5500 करोड़ का निवेश होगा। 2021 से वर्ष 2025 तक 4 वर्षों में प्रतिवर्ष 1000 मेगावाट की परियोजनाए स्थापित कर लक्ष्य हासिल किया जाएगा।
सीएम ने कहा कि नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, भारत सरकार की अल्ट्रा मेगा रिन्युएबुल सोलर पावर पार्क योजना के तहत 1200 मेगावाट क्षमता की जालौन में सोलर पावर पार्क की स्थापना की सैद्वान्तिक सहमति एमएनआरई से मिल गई है। इस पार्क की स्थापना यूपीनेडा एवं एनएचपीसी लिमिटेड के संयुक्त उपक्रम बुन्देलखण्ड सौर ऊर्जा लिमिटेड (बीएसयूएल) करेगा। इसी योजना के तहत 600-600 मेगावाट क्षमता की सोलर पावर पार्क की झांसी और ललितपुर में स्थापना की सैद्वान्तिक सहमति दी गई है। इन सोलर पार्क की स्थापना यूपीनेडा एवं टीएचटीसी लिमिटेड के संयुक्त उपकम टीयूएससीओ लिमिटेड द्वारा की जाएगी।
उत्तर प्रदेश में सौर एवं बायो ऊर्जा की असीमित संभावना: सीएम
रिन्यूएबल एनर्जी इन्वेस्ट मीट एंड एक्सपो इन्वेस्ट-2020 के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि ऊर्जा की खपत एवं उत्पादन विकास का मुख्य आधार है। ऊर्जा का उपभोग, कृषि, उद्योग, ट्रान्सपोर्ट, रोजगार सृजन सरीखे कार्यक्रमों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। प्रदेश के विकास एवं औद्योगीकरण में अक्षय ऊर्जा स्रोतों के माध्यम से बड़े पैमाने पर ऊर्जा उत्पादन विशेष कर सौर एवं बायो ऊर्जा की असीमित संभावनाओं के साथ ही मांग भी है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने हर गांव को तक बिजली पहुंचा दी है। सौभाग्य योजना से हर घर को बिजली दी जा रही है, जिसमें सौर ऊर्जा का भी काफी बड़ा योगदान है। किसानों की आय में बढ़ोत्तरी के उदेश्य से पीएम किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम कुसुम योजना) संचालित है। जिसके तहत किसान अनुपयोगी भूमि पर 500 किलोवाट क्षमता से लेकर अधिकतम 02 मेगावाट क्षमता के सौर उत्पादन पावर प्लाण्ट स्थापित कर रहे हैं।
सरकार का बायोफ्यूल से संचालित उद्यमों पर जोर
सीएम ने कहा कि सरकार का बायोफ्यूल से संबंधित उद्यम की स्थापना पर जोर है। बायोफ्यूल उत्पादन के14 प्रस्ताव स्वीकृत किए जा चुके हैं। गांव के बाजारों में रोशनी के लिए पण्डित दीन दयाल उपाध्याय सोलर स्ट्रीट लाइट योजना के तहत 25569 संयंत्र स्थापित हैं। वर्तमान वित्तीय वर्ष में 7000 सोलर स्ट्रीट लाइटों की स्थापना की जा रही है।
मुख्यमंत्री समग्र ग्राम विकास योजना में 13791 सोलर स्ट्रीट लाइटें लगाई गई हैं। 2500 मौजूदा वित्त वर्ष में लगाई जा रही। बताया कि सौभाग्य योजना के तहत जहां बिजली नहीं पहुंच पा रही है वैसे एक लाख घरों को सौर ऊर्जा से प्रकाशित किया जाएगा। इनमें 45000 घरों में सोलर पावर पैक स्थापित कर दिए गए हैं। प्रदेश के 3400 प्राथमिक विद्यालयों में सोलर आरओ प्लांट स्थापित किए गए हैं।