इस प्लांट में शहर से निकलने वाले गीले कूड़े से बायो सीएनजी गैस के अलावा खाद भी तैयार होगी। नगर निगम की टीम शहर से निकलने वाले गीले कूड़े को प्लांट तक पहुंचाएगी। प्लांट में लगी मशीनों को जरिए कूड़े की छंटाई होगी। इसके बाद जरूरत के अनुसार प्लांट में सीएनजी और खाद तैयार होगी। बायो सीएनजी प्लांट में रोजाना 200 टन गीले कचरे की जरूरत होगी। इस कचरे से रोजाना 1000 किलोग्राम बायो सीएनजी का उत्पादन होगा। साथ ही 40 टन जैविक खाद भी बनेगी। इससे महानगर से रोजाना निकलने वाले 350 टन में से ज्यादातर कूड़े का निस्तारण हो जाएगा।
नगर निगम को हरेक साल मिलेगी 56 लाख रुपये रॉयल्टी
इस प्लांट को लगाने से लेकर संचालन तक का पूरा खर्च मुंबई की कंपनी एवरइन्वायरो रिसोर्स मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड को वहन करना है। यहां तक कि प्लांट में लगे कर्मचारियों को वेतन आदि भी कंपनी ही देगी। वहीं, नगर निगम को केवल जमीन उपलब्ध करानी है। इस जमीन के एवज में प्लांट संचालन करने वाली कंपनी प्रत्येक साल रायल्टी के रूप में नगर निगम को 56 लाख रुपये भी देगी। 15 साल के बाद कंपनी चलती हालत में नगर निगम को यह प्लांट सौंप देगी।
एक साल में प्लांट के शुरू हो जाने की संभावना
नगर निगम के चीफ इंजीनियर संजय चौहान ने बताया कि एक साल में कंपनी इस प्लांट को तैयार कर लेगी। इसके बाद शहर का कूड़ा वहां गिरने लगेगा। फिर बीयो सीएनजी के अलावा जैविक खाद बनाई जाने लगेगी। कंपनी इस बायो सीएनजी और जैविक खाद का व्यावसायिक इस्तेमाल करेगी। यानी इसे बाजार में बेचेगी और अपना खर्च निकालेगी। हालांकि नगर निगम को दोनों चीजें कुछ कम कीमत पर मिलेंगी। इंदौर में इसी कंपनी के द्वारा प्लांट लगाया गया है और इससे वह अपना पूरा खर्च निकालती है।