मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को गोरखपुर में बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में शिक्षक सम्मान समारोह को संबोधित किया। इस दौरान सीएम योगी ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में ठेके पर नकल होती थी, जिससे युवाओं के सामने पहचान का संकट था। अब शिक्षकों के प्रयासों और नवाचार से शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ी है। प्रदेश का सम्मान भी बढ़ा है।
मुख्यमंत्री ने माध्यमिक और बेसिक शिक्षा के शिक्षकों को सम्मानित किया। उन्होंने उन शिक्षकों की सराहना की जिन्होंने नवाचार किया और विद्यार्थियों का नामांकन बढ़ाया। पढ़ाई के नए तरीके अपनाने वाले शिक्षकों को मंच पर सम्मानित किया गया। इसका उद्देश्य दूसरे शिक्षकों को भी प्रेरित करना था। उन्होंने सभी शिक्षकों से शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने का प्रयास करने को कहा। विद्यालयों में बच्चों की रुचि बढ़ाने और उन्हें आधुनिक तकनीक से जोड़ने पर भी जोर दिया गया।
शिक्षा में तकनीक का महत्व
मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाला समय एआई, रोबोटिक्स और थ्री-डी तकनीक का है। इनके बढ़ते उपयोग को देखते हुए शिक्षकों और विद्यार्थियों को इन्हें समझना होगा। अभी से इन तकनीकों को अपनाने की जरूरत है। शिक्षा में तकनीक का इस्तेमाल बच्चों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करेगा। यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
पूर्ववर्ती सरकार पर निशाना
शिक्षक सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्ववर्ती सरकार की प्राथमिकताओं पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि सैफई महोत्सव में पैसा बहाने के बजाय शिक्षा पर खर्च होता। इससे प्रदेश के लाखों बच्चों का भविष्य संवर सकता था। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि बर्मिंघम से रथ मंगाने में जितना खर्च होता था। उतने में बच्चों के भविष्य की मजबूत नींव रखी जा सकती थी।
बेसिक शिक्षा में सुधार
मुख्यमंत्री ने बताया कि 2017 से पहले बेसिक शिक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ था। अब इसमें आमूलचूल परिवर्तन किया गया है। प्रोजेक्ट अलंकार के तहत प्रदेश में 2,100 से अधिक विद्यालयों के भवनों को बेहतर बनाया गया है। उन्होंने कहा कि यह काम पहले भी हो सकता था, लेकिन तब प्राथमिकताएं अलग थीं। योगी ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश का शिक्षा मॉडल पूरा देश देख रहा है और सरकार इसे मजबूत करने के लिए लगातार काम करेगी।