जानकारी के मुताबिक, सीएचसी बांसगांव में छह बेड का इंसेफेलाइटिस ट्रीटमेंट सेंटर बनाया गया है। इलाज कराने वालों की सूची में दर्ज पंकज यादव पुत्र महेंद्र यादव निवासी गोछरन के बारे में जब पड़ताल की गई तो पता चला कि इस का नाम का व्यक्ति पूरे गांव में नहीं है। सूची में इनके नाम के समक्ष अंकित मोबाइल नंबर पर कॉल किया गया तो पता चला कि यह नंबर हरदोई के नसीम नाम के व्यक्ति का है। उन्होंने बताया कि उनके घर में न तो कोई इंसेफेलाइटिस से बीमार हुआ और न ही कभी कोई गोरखपुर गया।
इसी तरह प्रतिभा पुत्री लालू के नाम पर दर्ज मोबाइल नंबर पर संपर्क किया गया तो पता चला कि यह नंबर रायबरेली का है। महिला ने बताया कि उनके घर से कभी कोई गोरखपुर गया ही नहीं। कुछ ऐसी ही कहानी खुशी पुत्री रामबीर की है। यह नाम भी इसेंफेलाइटिस मरीजों की सूची में है। इस मरीज के मोबाइल नंबर पर कॉल करने पर रामबीर की जगह सन्नी नाम के किसी व्यक्ति ने फोन उठाया। उन्होंने खुशी पुत्री रामबीर नाम के बारे में अनभिज्ञता जाहिर की। अपनी पुत्री का नाम संजना बताया।
एक अन्य मरीज रिया पुत्री राज, पता बड़ावन बांसगांव तहसील की है। दर्ज मोबाइल फोन पर एक महिला से बात हुई। महिला ने बताया कि तीन वर्ष की खुशी को बुखार-खांसी थी। इलाज कराने गए थे, लेकिन बच्ची को इंसेफेलाइटिस नहीं था। वह बिल्कुल ठीक है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहली प्राथमिकताओं में इंसेफेलाइटिस की रोकथाम है। वह जब भी गोरखपुर आते हैं, तब इंसेफेलाइटिस से संबंधित जानकारी लेते हैं। मुख्यमंत्री कहते हैं कि 90 फीसदी तक इंसेफेलाइटिस का कहर रोकने में सरकार कामयाब रही है। इस बीमारी के खिलाफ वह लंबे समय से लड़ाई लड़ रहे हैं। अब कामयाबी मिल रही है। मुख्यमंत्री का दावा बिल्कुल सही है।
इंसेफेलाइटिस पर रोकथाम का आंकड़ा और बढ़ सकता है लेकिन स्वास्थ्य महकमा इसपर पलीता लगाने में जुटा है। बांसगांव स्थित इंसेफेलाइटिस ट्रीटमेंट सेंटर (ईटीसी) पर जो मामला सामने आया है, उससे लगता है कि इंसेफेलाइटिस के मामले और कम हुए हैं। गलत रिपोर्टिंग व फर्जीवाड़े से इंसेफेलाइटिस के मरीज बढ़ाए जा रहे हैं।
बांसगांव सीएचसी अधीक्षक डॉ. महेश कुमार ने बताया कि मरीजों का नाम, पता और उनका मोबाइल नंबर रिकॉर्ड में दर्ज रहता है। गलत नाम और पते कैसे दर्ज हुए, इसकी जानकारी नहीं है। मेरी तबीयत खराब है। मैं छुट्टी पर हूं। सीएचसी पर जाते ही इसका पता लगाया जाएगा कि आखिर चूक कहां से हुई है।
सीएमओ डॉ. श्रीकांत तिवारी ने बताया कि मामले की जानकारी मीडिया के जरिए मिली है। इस संबंध में सीएचसी से पूरी जानकारी ली जाएगी। इसके बाद ही सही जानकारी मिल सकेगी।