भाईजी के प्रति श्रद्धार्चन के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उनकी समाधि स्थली पर गए और पुष्पांजलि अर्पित कर अपनी श्रद्धा निवेदित की। इस अवसर पर कथावाचक विश्वनाथ भाई काश्यप, अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के राष्ट्रीय संगठन सचिव डॉ. बालमुकुंद पांडेय, सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु सिद्धार्थनगर के अधिष्ठाता कला संकाय प्रो. हरीश कुमार शर्मा, भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद के निदेशक शोध एवं प्रशासन डॉ. ओमजी उपाध्याय, हनुमान प्रसाद पोद्दार स्मारक समिति के सचिव उमेश सिंहानिया, संयुक्त सचिव रसेंदु फोगला, न्यासी प्रमोद मातनहेलिया, विष्णु प्रसाद अजित सरिया आदि मौजूद रहे।
पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है सनातन धर्म
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि सनातन धर्म केवल पूजा-पाठ या उपासना विधि तक सीमित नहीं है। यह मूलत: जीवन पद्धति है जिसमें समस्त मानव कल्याण, सांसारिक अभ्युदय से लेकर नि:श्रेष्य के साथ भौतिक जीवन में उत्कर्ष से लेकर मोक्ष की प्राप्ति तक की विराटता समाहित है। ‘मैं ही बड़ा’ सनातन में यह भाव कभी नहीं होता। यह मेरा है, यह तेरा है का भाव संकुचित बुद्धि के लोग रखते हैं।
भारत में प्रारंभ हो चुका है सांस्कृतिक अभ्युदय
मुख्यमंत्री ने कहा कि भाई जी जिन-जिन अभियानों से जुड़े रहे, उनमें से सभी कार्य एक-एक करके पूरे होते दिख रहे हैं। अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर बन रहा है। काशी विश्वनाथ धाम का कायाकल्प हो गया है। ब्रज क्षेत्र नए कलेवर में निखर रहा है। व्यापक परिवर्तन के रूप में प्राकृतिक खेती के माध्यम से भारतीय गोवंश को पुनर्जीवन मिल रहा है। योग को वैश्विक मान्यता मिली है। प्रयाग का भव्य एवं दिव्य कुंभ यूनेस्को की तरफ से मानवता की मूर्ति धरोहर घोषित हो चुका है। यह सभी भारत के सांस्कृतिक अभ्युदय के प्रारंभ का प्रमाण हैं।
भारतीय जीवन परंपरा को मिली वैश्विक मान्यता
मुख्यमंत्री ने कहा कि सदी की महामारी कोरोना संकट काल में भारतीय जीवन परंपरा को वैश्विक मान्यता मिली। 21 जून को दुनिया के 150 से अधिक देश विश्व योग दिवस के माध्यम से भारत से जुड़ते हैं। चीन जैसा देश जो ईश्वर को नहीं मानता, लेकिन योग को मानता है। भारत के आयुर्वेद, योग व नेचुरोपैथी दुनिया को कितना कुछ दे सकते हैं, कोरोना संकट में सबने इसे देखा, महसूस किया और अपनाया। हमारे ऋषियों-मुनियों में वैदिक ज्ञान को लिपिबद्ध कर संरक्षित किया।
स्वतंत्र भारत में शिक्षा का प्रयास सराहनीय
मुख्यमंत्री ने कहा कि सिर्फ सत्ता का हस्तांतरण या राजनीतिक आजादी ही संपूर्ण आजादी नहीं हो सकती थी। इस बात को भाई जी बखूबी समझते थे। आजादी के बाद के भारत का स्वरूप क्या हो, इस चिंतन और गुलामी के चिह्नों को दूर करने के अभियान में वह हमेशा अग्रणी रहे। गोरक्षा, श्रीरामजन्मभूमि, श्रीकृष्णजन्मभूमि, अछूतोद्धार, मानव कल्याण व आपदाग्रस्त मानव को लाभ दिलाने के अभियानों में वह सदैव आगे रहे। स्वतंत्र भारत में शिक्षा के लिए भी उनका सराहनीय प्रयास रहा।