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गोरखपुर: यूट्यूब से कोडिंग सीखकर साइबर ठगी के लिए बनाने लगा एपीके फाइल, 17 लाख की ठगी में छात्र गिरफ्तार

Tue, 27 Oct 2026 02:27 PM IST
अनुराग रंजन अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर

सार

पुलिस अब छात्र के लैपटॉप में मौजूद फाइलों, कोड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल कर रही है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि एपीके फाइलें किस तरह तैयार की गईं, उन्हें किन लोगों को भेजा गया और ठगी की रकम किन खातों में पहुंची। मामले में पटना बिहार निवासी दीपेश पटेल और दिल्ली निवासी भावेश यादव के नाम भी अन्य संदिग्धों के रूप में सामने आए हैं।
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साइबर क्राइम - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार
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यूट्यूब पर वीडियो देखकर प्रोग्रामिंग और कोडिंग सीखने वाला 18 वर्षीय इंटरमीडिएट का छात्र साइबर ठगी के लिए एपीके फाइल तैयार करने लगा। दिल्ली के एक सेवानिवृत्त कर्मचारी को लाइफ सर्टिफिकेट बनवाने का झांसा देकर 17 लाख रुपये की ठगी के मामले में दिल्ली की साइबर सेल ने सोमवार को रामगढ़ताल क्षेत्र स्थित साकेतनगर से आरोपी छात्र करन को गिरफ्तार किया।

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न्यायालय में पेश करने के बाद पुलिस उसे ट्रांजिट रिमांड पर लेकर दिल्ली रवाना हो गई। जांच के मुताबिक, मूलरूप से संतकबीरनगर जिले के धनघटा पतीजीव निवासी करन कुमार अपनी मां कविता, बहन रितिका के साथ साकेतनगर स्थित टी/10 प्रथम तल पर किराये पर रहकर 12वीं की पढ़ाई कर रहा था। करीब आठ महीने पहले वह टेलीग्राम के एक ग्रुप से जुड़ा। इसी के जरिये उसकी पहचान वाराणसी निवासी निशांत यादव से हुई। आरोप है कि निशांत उससे साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाली एपीके फाइलें तैयार करवाता था। इसके बदले उसे हर महीने 50 हजार रुपये दिए जाते थे।

पूछताछ में करन ने यूट्यूब वीडियो की मदद से प्रोग्रामिंग लैंग्वेज सीखने और कोडिंग शुरू करने की बात बताई। जांच में सामने आया कि वह अब तक दो एपीके फाइल तैयार कर चुका था। इनमें ‘रूट फोर्स लाइव’ और ‘जिनोशेल डॉट कॉम’ नाम शामिल हैं।
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साइबर गतिविधियों में ‘डिजिटल लुटेरा’ नाम के सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल की जानकारी भी सामने आई है। पुलिस को आरोपी करन कुमार के कब्जे से लैपटॉप और आईफोन मिले हैं। जांच में यह भी पता चला कि निशांत ने उसे एक मैकबुक उपहार में दिया था।

लाइफ सर्टिफिकेट के नाम पर डाउनलोड कराई थी फाइल
एसपी सिटी निमिष पाटील के मुताबिक, पश्चिमी दिल्ली के हरिनगर क्षेत्र में रहने वाले एक सेवानिवृत्त कर्मचारी को लाइफ सर्टिफिकेट उपलब्ध कराने का झांसा दिया गया था। फाइल डाउनलोड करने के बाद उनके बैंक खाते से 17 लाख रुपये निकाल लिए गए। मामले में इसी महीने हरिनगर स्थित साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। डिजिटल साक्ष्यों की जांच में करन की भूमिका सामने आने के बाद दिल्ली पुलिस की टीम गोरखपुर पहुंची और उसे गिरफ्तार कर लिया।

लैपटॉप के डिजिटल साक्ष्यों की जांच जारी
पुलिस अब छात्र के लैपटॉप में मौजूद फाइलों, कोड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल कर रही है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि एपीके फाइलें किस तरह तैयार की गईं, उन्हें किन लोगों को भेजा गया और ठगी की रकम किन खातों में पहुंची। मामले में पटना बिहार निवासी दीपेश पटेल और दिल्ली निवासी भावेश यादव के नाम भी अन्य संदिग्धों के रूप में सामने आए हैं। दिल्ली पुलिस उनकी तलाश में दबिश दे रही है।

 

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