डॉ. देवेंद्र कुमार राय
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दुनिया भर में वैज्ञानिकों के लिए चुनौती बने कोरोना की दवा बनाने का एक बार फिर से दावा किया गया है। यह दावा फाइजर कंपनी ने किया है। फाइजर कंपनी ने कहा है कि सिंगल डोज वाली इस दवा का लैब के अलावा मरीजों पर सफल परीक्षण किया गया है। खास बात यह है कि यह दवा 89 फीसदी असरदार पाई गई है। फाइजर के जिन वैज्ञानिकों की टीम ने इस दवा पर काम किया है उसमें गोरखपुर के डॉ. देवेंद्र कुमार राय भी शामिल हैं।
डॉ. राय यूएस की प्रमुख दवा कंपनी फाइजर में सीनियर साइंटिस्ट हैं। उनके साथ टीम में 20 से ज्यादा विभिन्न देशों के वैज्ञानिक काम कर रहे थे। डॉ. देवेंद्र का एक शोधपत्र साइंस पत्रिका ने दो नवंबर 2021 को प्रकाशित किया है।
डुमैरला के निवासी
डॉ. देवेंद्र झंगहा के डुमैरला निवासी किसान गणेश राय के छोटे पुत्र हैं। देवेंद्र की माता गृहिणी हैं और उनके बड़े भाई हरिराम राय कस्टम विभाग में अपर सहायक निदेशक हैं। अमर उजाला संवाददाता से मोबाइल फोन पर डॉ. देवेंद्र कुमार राय ने बात की है। उन्होंने अपनी सफलता की कहानी भी बताई और कहा कि करीब एक वर्ष के शोध के बाद यह कामयाबी मिली है।
दवा से जुड़ी रिसर्च ऐन ओरल सार्स कोवी-2 एम इनहीबिटर क्लिनिकल कैंडिडेट फॉर ट्रीटमेंट ऑफ कोविड-19 के उपचार के लिए औषधि की खोज से संबंधित है। यह दवा प्रयोगशाला और क्लिनिकल ट्रायल दोनों में सफल रही है। ब्रिटेन की मर्क दवा का रिजल्ट 43 फीसदी पाया गया था लेकिन मेरे द्वारा खोजी गई दवा 89 फीसदी कारगर है। इस एंटी वायरस दवा को बाजार में लाने की कवायद चल रही है। फाइजर कंपनी जल्द ही इमरजेंसी उपयोग की अनुमति यूएस सरकार से मांगेगी।
ऐसे हुआ क्लीनिकल ट्रायल
दवा का क्लीनिकल ट्रायल कोरोना के 389 गंभीर मरीजों पर किया गया है। इलाज के दौरान तीन मरीजों की मौत हुई और बाकी सारे मरीज ठीक हो गए। 385 गंभीर मरीजों का इलाज सामान्य दवा से किया गया तो 27 की मौत हुई थी।
पांच दिन की होगी खुराक
परीक्षण के बाद जो दवा विकसित की गई है उसकी पूरी खुराक पांच दिन की होगी। इसकी रोजाना दो टेबलेट (सुबह-शाम) मरीज को खाना होगा। इस दवा की खासियत यह है कि गंभीर संक्रमण होने के पांच दिन बाद भी दवा शुरू करने पर वह बीमारी को नियंत्रित कर देता है।
जल्द ही बाजार में आएगी दवा
डॉ. देवेंद्र के मुताबिक इस शोध ने कोरोना हो जाने की अवस्था में कोरोना केंद्रित दवा उपलब्ध होने का मार्ग प्रशस्त किया है। जल्द ही इस दवा के बाजार में उपलब्ध हो जाने की संभावना है। दवा से कोरोना महामारी के भय से जनमानस को मुक्ति मिल सकेगी।
फाइजर से पहले येल यूनिविर्सटी में थे कार्यरत
डॉ. देवेंद्र अमेरिकन सरकार की कृषि शोध सेवा में वैज्ञानिक थे। वर्ष 2018 से 2020 तक येल यूनिवर्सिटी में कार्यरत रहे। यह यूनिवर्सिटी विश्व के टॉप-10 यूनिवर्सिटी में से एक है। सितंबर 2020 से पर्ल रिवर न्यूयार्क में सीनियर साइंटिस्ट वायरोलॉजी पद पर कार्यरत हैं। उनकी पत्नी आयुषी राय भी अमेरिकन सरकार की कृषि शोध सेवा में वायरोलॉजी के क्षेत्र में माइक्रोबायोलॉजिस्ट हैं।
सेंट एंड्रयूज कॉलेज से की बीएससी की पढ़ाई
डॉ. देवेंद्र की इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई प्रताप नरायन सिंह जनता इंटर कॉलेज बरही व बीएससी की पढ़ाई सेंट एंड्रयूज कॉलेज से हुई है। इसके बाद परास्नातक की पढ़ाई उन्होंने बायोटेक्नोलॉजी कालीकट विश्वविद्यालय से की। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पीएचडी करके बाद उन्हें डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नॉलाजी, भारत सरकार और आईसीएमआर से फेलोशिप भी मिली है।