योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही गोरखपुर विकास की राह पर दौड़ पड़ा है। साल दर साल नई-नई विकास परियोजनाएं शुरू हो रही हैं। वर्तमान में भी कई परियोजनाएं पाइपलाइन में हैं। इनके लिए जमीन अधिगृहीत कर मुआवजा देना पड़ेगा। यही वजह है कि जिले में सर्किल रेट की वृद्धि पर ब्रेक लगी है।
वर्तमान में भी गोड़धोइया नाले के निर्माण एवं सुंदरीकरण के लिए अधिगृहीत की जाने वाली जमीन पर मुआवजे के तौर पर करीब 700 करोड़ खर्च होने का अनुमान है। इसी तरह, जंगल कौड़िया से जगदीशपुर तक फोरलेन प्रस्तावित है। कालेसर से जगदीशपुर तक फोरलेन को सिक्स लेन किया जाना है।
देवरिया बाईपास और पैडलेगंज से फिराक गोरखपुरी चौराहे तक भी फोरलेन प्रस्तावित है। ऐसे ही कई परियोजनाएं इस साल शुरू होनी हैं। ऐसे में सर्किल रेट बढ़ने से मुआवजे के तौर पर सरकार को मोटी रकम खर्च करनी पड़ती।
डीएम कृष्णा करूणेश ने कहा कि गोरखपुर जिले के विकास के लिए कई ऐसी सरकारी योजनाएं हैं जो संचालित हो रही हैं या पाइपलाइन में है, उनके लिए जमीन की जरूरत पड़ेगी। सर्किल रेट बढ़ने से इन योजनाओं की कीमत बढ़ जाएगी। शासन पर भार बढ़ेगा। इन्हीं वजहों से इस साल भी सर्किल रेट में वृद्धि नहीं करने का निर्णय किया गया है।
वित्तीय वर्ष 2021-22 में मंडल की स्थिति
| जिला |
लक्ष्य |
प्राप्त हुआ |
| गोरखपुर |
666.05 करोड़ |
465.76 करोड़ |
| महराजगंज |
139.50 करोड़ |
116.99 करोड़ |
| देवरिया |
250.21 करोड़ |
212.13 करोड़ |
| कुशीनगर |
180.98 करोड़ |
168.20 करोड़ |
| कुल |
1236.74 करोड़ |
963.09 करोड़ |
वित्तीय वर्ष 2022-23 का लक्ष्य
गोरखपुर 743.14 करोड़
देवरिया 272.73 करोड़
महराजगंज 154.01 करोड़
कुशीनगर 196.27 करोड़
कुल 1366.15 करोड़