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Gorakhpur News: बिशप डोमिनिक कोक्कट के अंतिम दर्शन के लिए उमड़ा मसीही समाज

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गोरखपुर। गोरखपुर डायोसीज के पहले धर्माध्यक्ष बिशप डोमिनिक कोक्कट का अंतिम संस्कार मंगलवार को जोसेफ्स कैथेड्रल सिविल लाइंस बिशप परिसर में किया गया। इसमें देश के विभिन्न जगहों से बिशप व पुरोहित शामिल हुए। इसमें पवित्र मिस्सा का संस्कार हुआ। पार्थिव शरीर धार्मिक वस्त्रों से सुसज्जित था। इसमें छड़ी, टोपी, अंगूठी शामिल रही। जो उनके पद का प्रतीक है। अंतिम संस्कार में भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री राधा मोहन दास अग्रवाल भी शामिल हुए।
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गोरखपुर डायोसीज के पहले धर्माध्यक्ष बिशप डोमिनिक कोक्कट ने 25 जनवरी को सुबह 10:30 बजे अंतिम सांस ली थी। बिशप को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए उनके पार्थिव शरीर को सेंट जोसेफ्स कैथेड्रल सिविल लाइंस में 26 जनवरी की दोपहर से 27 जनवरी दोपहर दो बजे तक रखा गया था। इसमें मसीही समाज के लोगों ने श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई। पवित्र शास्त्र पर प्रवचन सीरो मालाबार चर्च के प्रमुख मेजर आर्च बिशप रेफरल थट्टी ने दिया व उनके मुख से पवित्र शास्त्र लगाया। समाज के लोगों ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि बिशप डोमिनिक कोक्कट की ओर से शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक क्षेत्र में किए गए योगदान के कारण उनकी प्रसिद्धि खूब रही है। वे एक योग्य प्रशासक शिक्षाविद, समाज सुधारक के रूप में सदैव याद किए जाएंगें। निधन से गोरखपुर की अपूरणीय क्षति हुई है।

इस दौरान केरल से सीरो मलाबार चर्च के प्रमुख मेजर आर्च बिशप राफेल थट्टिल, आगरा से क्षेत्रीय आर्च चर्च बिशप राफी मंजली, फरीदाबाद से आर्च बिशप कुरियाकोस, भरणिकुलंगरा, पटना से आर्च बिशप सेबेस्टियन कल्लूपुरा व स्थानीय बिशप मैथ्यू नेल्लीकुन्नेल एवं सेवानिवृत्त बिशप तुरुथीमटटमए, फादर बेनीकोइकाकुड्यिल समेत बड़ी संख्या में मसीही समाज के लोग व शहर के गणमान्य शामिल रहे।
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निधन पर जताया शोक

उत्तर प्रदेश आवासीय विश्वविद्यालय शिक्षक महासंघ के अध्यक्ष व विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर चित्तरंजन मिश्र ने शोक जताते हुए कहा कि बिशप डोमिनिक कोक्कट के निधन से गोरखपुर के नागरिक समाज की गहरी क्षति हुई है। बिशप कोक्कट की रचनात्मक सक्रियता से इस अंचल को शिक्षा और स्वास्थ्य की बेहतरी के लिए नयी नयी संस्थाएं मिलती रही हैं। उनका व्यक्तित्व प्रेम करुणा और सद्भाव से भरा हुआ था। गोरखपुर विश्वविद्यालय की कार्य परिषद के सदस्य के रूप में उन्होंने विश्वविद्यालय की स्वायत्तता और शिक्षकों के स्वाभिमान के लिए बराबर अपनी आवाज उठाई। शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने जब भी शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए उनसे सहयोग की अपेक्षा की वे उनकी सहायता के लिए हर समय न सिर्फ तैयार रहे बल्कि कार्य परिषद की बैठकों में शामिल होकर यह सुनिश्चित भी किया कि उनका उचित समाधान हो।
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