फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Diwali 2020: वनटांगिया के बच्चों को रहता है 'टॉफी वाले बाबा' का इंतजार, हर साल यहां दिवाली मनाते हैं सीएम योगी

Sat, 14 Nov 2020 10:04 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
विज्ञापन
1 of 5
सीएम योगी आदित्यानाथ। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस बार भी वनटांगिया लोगों के बीच दिवाली मनाएंगे। जिले के चार अन्य वनटांगिया गांवों के लोग भी यहां आएंगे। सीएम योगी का इंतजार वनटांगिया के बड़े बुजुर्ग ही नहीं, बल्कि बच्चों तक को रहता है। बच्चे उन्हें टॉफी वाला बाबा कहते हैं।
विज्ञापन

2 of 5
सीएम योगी आदित्यानाथ। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला।
जंगल तिनकोनिया नंबर तीन के 80 वर्षीय चंद्रजीत जब यह कहते हैं कि भगवान का नाम तो सबने सुना है, लेकिन हमने तो इस रूप में महराज जी का ही दर्शन किया है। हमारे भगवान ने बिना कोई मन्नत मांगे सभी वनटांगियों को वह सब कुछ दिया, जिसके इंतजार में हमारी कई पीढ़ियां गुजर गईं, तो इसमें आभार के साथ वनटांगिया के लोगों का संघर्ष और पीड़ा छुपी होती है। सिर्फ चंद्रजीत ही नहीं, इस गांव के कृष्णमोहन, राम लगन, मालती जैसे तमाम बुजुर्गों, युवा और महिलाएं सीएम योगी को भगवान का दर्जा देते हैं। तकरीबन 100 साल पहले बसे वनटांगिया गांवों में बुनियादी सुविधाओं के नाम पर शून्य था, लेकिन सीएम योगी के कार्यकाल में ये गांव शहर जैसी सुविधाओं के साथ कदमताल कर रहे हैं।
विज्ञापन

3 of 5
सीएम योगी आदित्यनाथ। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला।
वनटांगियों के लिए मुकदमा भी झेला है योगी आदित्यनाथ ने
वनटांगिया लोगों के बीच शिक्षा की रोशनी पहुंचाने के योगी आदित्यनाथ के प्रयासों के खास सहयोगी एमपीपीजी कालेज जंगल धूसड़ के प्राचार्य डॉ. प्रदीप राव बताते हैं कि वन्यग्रामों के लोगों को जीवन की मुख्यधारा में जोड़ने के दौरान 2009 में सीएम योगी को मुकदमा तक झेलना पड़ा। वनटांगिया बच्चों के लिए एस्बेस्टस शीट डाल एक अस्थायी स्कूल का निर्माण उनके निर्देश पर कार्यकर्ता कर रहे थे, इस पर वन विभाग ने कार्य को अवैध बताकर एफआईआर दर्ज कर दी।

 

4 of 5
सीएम योगी आदित्यनाथ। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला।
साल 2009 से वनटांगियों के बीच दीवाली मनाते है योगी
सीएम योगी ने वर्ष 2009 से वनटांगिया समुदाय के साथ दिवाली मनाने की परंपरा शुरू की जो अब तक जारी है। मुख्यमंत्री बनने के बाद भी योगी इस परंपरा का निर्वाह करना नहीं भूलते हैं। इस दौरान बच्चों को मिठाई, टॉफी, कापी-किताब और आतिशबाजी का उपहार देकर पढ़ने को प्रेरित करते हैं। बच्चे उन्हें टॉफी वाले बाबा के रूप में याद करते हैं।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
सीएम योगी आदित्यनाथ। (फाइल) - फोटो : अमर उजाला।
100 साल तक झेला उपेक्षा का दंश
ब्रिटिश हुकूमत में जब रेल पटरियां बिछाई जा रही थीं तो स्लीपर के लिए बड़े पैमाने पर जंगलों से साखू के पेड़ों की कटान हुई। इसकी भरपाई के लिए अंग्रेज सरकार ने साखू के पौधों के रोपण और उनकी देखरेख के लिए गरीब भूमिहीनों को जंगल में बसाया। अलग-अलग गांवों के ये ऐसे लोग थे जिनके पास जीवनयापन का कोई जरिया नहीं था। साखू के जंगल बसाने के लिए वर्मा देश की टांगिया विधि का इस्तेमाल किया गया, इसलिए वन में रहकर यह कार्य करने वाले वनटांगिया कहलाए।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें