डॉ. चतुर्वेदी का कहना है कि बाल अधिकारों की रक्षा और उनके संरक्षण के लिए ही आयोग का गठन किया गया है। किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम 2000 के तहत भी बच्चों के समूचित देखभाल और संरक्षण का अधिकार आयोग को प्राप्त है। इसके तहत दो ऐसे निकाय हर जिले में स्थापित किए गए हैं जिसमें जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (जेजेबी) और चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी) शामिल हैं, जो बच्चों के अधिकारों के संरक्षण के प्रति समर्पित हैं।
हालांकि इस एक्ट में 2015 में कुछ बदलाव भी किए गए हैं। इसी के तहत प्रत्येक जिले में बच्चों के अधिकारों की रक्षा करने के लिए बाल कल्याण समिति का गठन किया गया है। समिति में एक महिला का होना आवश्यक है।
इसी समिति के निर्देशन में शिशु गृह, बाल गृह औरबालिका गृह का संचालन किया जाता है। शिशु गृह में तीन साल तक की उम्र के बच्चों को लिया जाता है। इससे अधिक उम्र के बच्चों के लिए बालगृह बालक और बालगृह बालिका हैं।
कोरोना वायरस के संक्रमण के इस दौर में तमाम माताएं बच्चों को जन्म दे रही हैं । ऐसे में उन्हें अपने साथ ही अपने दुधमुंहे की भी चिंता सताती है । इस संबंध में गर्भवती महिलाओं और जच्चा-बच्चा को कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
उसके अनुसार यदि कोई मां कोरोना से संक्रमित हो तो उसके बच्चे को मां से तब तक अलग रखा जाना चाहिए, जब तक कि वह पूरी तरह से स्वस्थ नहीं हो जाती है। आईसीएमआर के अनुसार यदि गर्भवती को सर्दी, जुकाम, बुखार या सांस लेने में तकलीफ की शिकायत है अथवा कोरोना वायरस या इससे संक्रमित किसी व्यक्ति के संपर्क में आने का संदेह है, तो तुरंत ही चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।
कोरोना संक्रमण काल में प्रसूताओं को विशेष साफ-सफाई रखनी चाहिए। वह सदैव मास्क पहनकर रहें। नवजात को उठाने से पहले और बाद में हाथ जरूर धोएं। गर्भवती और प्रसूताएं कम से कम लोगों के संपर्क में रहें । संभव हो तो अलग बाथरूम का इस्तेमाल करें। यदि बाथरूम साझा हो तो इस्तेमाल करने से पहले उसे सैनिटाइज जरूर करें।