कुशीनगर जिले में तरयासुजान थाना क्षेत्र के अंतर्गत स्थित जवही दयाल गांव के सामने सोमवार को गंडक नदी में डूबे बालक का दूसरे दिन भी पता नहीं चला। उसकी खोजबीन में एसडीआरएफ की टीम मंगलवार को लगी रही, लेकिन सफलता नहीं मिली।
एपी बांध के किनारे स्थित जवही दयाल गांव के निवासी गिरेश चौधरी का 12 वर्षीय पुत्र अनुज चौधरी सोमवार को दिन के लगभग 11 बजे गंडक नदी के किनारे शौच करने गया था। उसी दौरान पैर फिसल जाने के कारण वह गहरे पानी में डूब गया। उसे नदी में डूबते देख एक अन्य बालक शोर मचाने लगे।
इसके बाद उस बालक के घरवालों के साथ ग्राम प्रधान दिनेश जायसवाल, अंगद निषाद, बृजकिशोर साहनी, पप्पू सिंह, शैलेंद्र चौधरी सहित कई लोग घटनास्थल पर पहुंचे थे। इस घटना की सूचना मिने पर तरयासुजान पुलिस और एसडीआरएफ के जवान मौके पर पहुंचकर तलाश शुरू कर दिए थे, लेकिन बालक का पता नहीं चला।
मंगलवार सुबह नौ बजे एसडीआरएफ के प्लाटून कमांडर ओंकार यादव, हेड कांस्टेबल महेंद्र सिंह, कांस्टेबल आलोक सिंह, धीरज तिवारी और शिवनाथ की टीम दोबारा घटनास्थल पर पहुंची। ग्राम प्रधान दिनेश जायसवाल, शफीक अंसारी, ओमप्रकाश निषाद, बृजकिशोर साहनी, रितेश चौधरी, श्रीकांत पासवान, शैलेंद्र चौधरी, प्रदीप गुप्ता, टुन्नू पटेल सहित पुरा गांव बांध पर उमड़ पड़ा।
सभी के दिल में एक ही आवाज उठ रही थी कि किसी तरह बालक मिल जाए। उसके बाद टीम के जवान नाव से गंडक नदी के दोनों किनारों पर बालक की खोजबीन शुरू कर दिए। टीम के जवान घरवालों के साथ बालक को खोजते खोजते विरवट कोंहवलिया, बांकखास और बाघाचौर तक गए, लेकिन कहीं उसका पता नहीं चला। जबकि रिश्तेदार भी उसे खोजने में दूसरे दिन भी लगे रहे।
इस घटना के बाद उस बालक के माता-पिता सहित उसके बड़े भाई नीतीश और तीन बहनों का रो-रोकर बुरा हाल है। बांध के किनारे बसे और गंडक नदी का रुख जानने वाले लोगों का कहना है कि गंडक नदी पहले से ही उफान पर है और सोमवार को जिस समय यह घटना घटी, उस समय भी नदी का बहाव काफी तेज था। ऐसे में बालक के नदी में बहकर काफी दूर निकल जाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है।