अभिनव ने शिकायत की थी कि उनकी फर्म ने ट्रांसफार्मर की आपूर्ति की थी और करीब 17 लाख रुपये के भुगतान की फाइल को दबा दिया गया था। बिल को पास कराने के लिए कार्यालय अधीक्षक अशोक चौधरी एक बिचौलिए के माध्यम से रुपये की मांग की जा रही थी।
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सीबीआई की टीम ने कार्रवाई के समय भुगतान संबंधित फाइल के अलावा कुछ और फाइलें भी कब्जे में ले लिया था। इस मामले में मंगलवार को रेल प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए चीफ ओएस को निलंबित कर दिया और साथ ही विभाग के 66 कर्मियों का भी तबादला कर दिया।
हालांकि, जिन कर्मचारियों का तबादला हुआ है, वे यहां चार साल से अधिक समय से तैनात थे। इस कार्रवाई को लेकर रेलवे के अफसर कुछ भी बोलने से इंकार कर रहे हैं।